मुंबई: सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन(CINTAA) में 11 एग्जिक्यूटिव कमिटी सदस्यों के इस्तीफे के बाद शुरू हुआ विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. कमिटी की संवैधानिक स्थिति, नए चुनाव और पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं. इसी बीच पद्मिनी कोल्हापुरे ने उपासना सिंह पर CINTAA सदस्यों के बीच गलतफहमी पैदा करने का आरोप लगाया है. अब इस आरोप पर उपासना सिंह ने ‘प्रभात खबर’ से एक्सक्लूसिव बातचीत में अपना पक्ष रखा है.
‘11 लोग बच्चे नहीं हैं कि मैं उन्हें मिसगाइड कर दूं’
उपासना सिंह ने कहा कि उन पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने कमिटी के सदस्यों को मिसगाइड किया. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि “11 लोग बच्चे नहीं हैं कि मैं उन्हें समझाकर इस्तीफा दिलवा दूं.” उनके मुताबिक, इस्तीफा देने वालों में बिंदु, हेमंत पांडे, मनोज जोशी और मुकेश ऋषि जैसे अनुभवी कलाकार शामिल हैं. ऐसे में यह कहना कि सभी लोग किसी के कहने पर इस्तीफा दे रहे हैं, उन्हें सही नहीं लगता.
उपासना के मुताबिक CINTAA के संविधान में 50 फीसदी से ज्यादा सदस्यों के इस्तीफा देने की स्थिति में कमिटी के भंग होने और चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने का प्रावधान है. उनका दावा है कि 21 सदस्यीय कमिटी में 11 लोगों ने इस्तीफा दिया है, यानी संख्या 50 फीसदी से ज्यादा है.
‘मैंने इस्तीफा दिया नहीं, एक्सेप्ट किया था'
अपने पद को लेकर उठ रहे सवालों पर उपासना ने साफ किया कि उन्होंने खुद इस्तीफा नहीं दिया था. उनका नाम उन 11 लोगों की इस्तीफा सूची में नहीं था. उन्होंने कहा कि वह उस समय CINTAA की जनरल सेक्रेटरी थीं और उन्होंने बतौर जनरल सेक्रेटरी उन सदस्यों के इस्तीफे स्वीकार किए थे.
उपासना का दावा है कि इसके बाद इस्तीफों से जुड़े दस्तावेज लेकर लेबर कमिश्नर के पास प्रक्रिया पूरी की गई और वहां से भी कमिटी के भंग होने से जुड़ा पत्र मिला. उनका कहना है कि लेबर कमिश्नर की ओर से यह भी कहा गया कि ऐसी स्थिति में EGM या AGM जैसी बैठक नहीं की जा सकती.
‘मदर बॉडी ने भी चुनाव कराने को कहा’
उपासना के मुताबिक इसके बाद उन्होंने CINTAA की मदर बॉडी FWICE से चुनाव कराने की मांग की. उनका दावा है कि FWICE की जनरल काउंसिल की बैठक में कई संबद्ध संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद थे और चुनाव कराने का फैसला लिया गया. उन्होंने बताया कि 12 सितंबर को चुनाव की तारीख घोषित की गई है.
हालांकि CINTAA के दूसरे पक्ष की ओर से कमिटी के भंग होने और इस्तीफों की संवैधानिक व्याख्या को लेकर अलग दावा किया गया है. यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है.
‘पद्मिनी कोल्हापुरे ने खुद को जनरल सेक्रेटरी घोषित कर दिया’
उपासना ने पद्मिनी कोल्हापुरे पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिना किसी EGM के उन्हें जनरल सेक्रेटरी घोषित कर दिया गया. उनके मुताबिक, पद्मिनी ने खुद को जनरल सेक्रेटरी और पूनम ढिल्लों को प्रेसिडेंट बताते हुए फेडरेशन को एक पत्र भेजा. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हेतल परमार को ट्रेजरार बनाया गया, जबकि पहले दीपक पराशर इस पद पर थे.
उपासना ने इन फैसलों को ‘इलीगल’ बताते हुए कहा कि उनके पास इससे जुड़े दस्तावेज और पत्र मौजूद हैं. उन्होंने दावा किया कि उनके पास लेबर कमिश्नर का पत्र, फेडरेशन का पत्र और इस्तीफा देने वाले सदस्यों के हस्ताक्षरित दस्तावेज भी हैं.
‘मेरे खिलाफ भी शो-कॉज नोटिस भेजा गया’
उपासना ने संस्था के कामकाज के तरीके पर भी सवाल उठाए. उनका आरोप है कि जो लोग मौजूदा व्यवस्था से सहमत नहीं थे, उन्हें शो-कॉज नोटिस दिए गए. उन्होंने कहा कि उन्हें भी रणवीर सिंह के मामले में नोटिस देकर पूछा गया था कि वह उनके समर्थन में क्यों बोलीं.
उपासना ने बताया कि वह FWICE की जनरल काउंसिल की सदस्य हैं और इसी हैसियत से रणवीर सिंह के मामले में अपनी बात रखने गई थीं. उन्होंने सवाल किया कि अगर CINTAA किसी कलाकार के हितों की रक्षा करने के लिए बनी संस्था है, तो अपने ही सदस्य के पक्ष में बोलने के लिए उन्हें स्पष्टीकरण क्यों देना पड़ा? उन्होंने यह भी कहा कि बाद में पद्मिनी कोल्हापुरे ने भी रणवीर का समर्थन किया था.
‘अगर मैं गलत हूं तो बाकी 11 लोग भी गलत हैं?’
उपासना ने कहा कि उनके खिलाफ आरोप लगाए जा सकते हैं, लेकिन यह कैसे माना जा सकता है कि बाकी 11 अनुभवी सदस्य भी गलत थे. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली चुनावी प्रक्रिया में हार चुके कुछ लोगों को बाद में कमिटी में शामिल किया गया.
अब उपासना का कहना है कि इस पूरे विवाद का समाधान सिर्फ नए और निष्पक्ष चुनाव हैं. उनका दावा है कि उनके पास अपने पक्ष में दस्तावेज मौजूद हैं और वह कानूनी प्रक्रिया के मुताबिक ही आगे बढ़ेंगी. दूसरी ओर CINTAA के मौजूदा पदाधिकारियों की ओर से उपासना के दावों को लेकर अलग पक्ष रखा गया है. ऐसे में 12 सितंबर को प्रस्तावित चुनाव इस पूरे विवाद का अगला बड़ा पड़ाव बन सकता है.
