The India Story: Slow Poison: एक छोटी-सी दुनिया है, जहां हर तरफ हरी-भरी फसलें दिखती हैं, लेकिन इसी हरियाली के पीछे एक डरावनी सच्चाई छिपी है. यही कहानी है फिल्म ‘द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन’, जो दिखाती है कि हमारी रोजमर्रा की थाली में कैसे धीरे-धीरे जहर घुलता जा रहा है. फिल्म 24 जुलाई को रिलीज हो रही है.
विरोध से शुरू होती है कहानी
टीजर की शुरुआत एक बड़े विरोध-प्रदर्शन से होती है, जहां किसान और आम लोग सड़क पर उतर आते हैं. उनका गुस्सा वकील अर्चना (काजल अग्रवाल) के खिलाफ फूटता है. भीड़ उनके खिलाफ जोरदार नारे लगाती है और गुस्से में उनके पर कालिख भी पोत दी जाती है. इसके बाद कहानी कोर्टरूम ड्रामा में बदल जाती है. यहां श्रेयस तलपड़े का किरदार योगेश पांडे अपनी बेटी की मौत के केस को लेकर न्याय की मांग करता है. वह आरोप लगाता है कि उसकी 7 साल की बेटी की मौत कैंसर से हुई, लेकिन इसके पीछे असली वजह रोजमर्रा के खाने में मौजूद जहरीले केमिकल और पेस्टिसाइड्स हैं. फिल्म यह भी दिखाती है कि फल, सब्जियां, दूध और दही जैसी चीजों में धीरे-धीरे जहर मिल चुका है, जो शरीर को गंभीर बीमारियों की ओर ले जा रहा है.
काजल अग्रवाल का पक्ष
कोर्ट में वकील अर्चना (काजल अग्रवाल) इस मामले को एक अलग नजरिए से पेश करती हैं. वह कहती हैं कि इस समस्या के लिए सिर्फ किसान जिम्मेदार नहीं हैं. टीजर में वह कहती हैं, ”फल-सब्जियां ये सब किसानों के माध्यम से खरीदी जाती है, किसान जो पेस्टिसाइड इस्तेमाल कर रहे है, उन्हें बनाने वाली कंपनियां और कंपनियों को इजाजत देने वाली सरकार भी दोषी है.”
एक पिता की दर्दभरी कहानी
टीजर में योगेश पांडे अपनी बीमार बेटी को बचाने के लिए अस्पतालों के चक्कर लगाता है, हर जगह मदद की उम्मीद करता है, लेकिन हालात उसके खिलाफ जाते हैं. समय पर इलाज न मिलने की वजह से उसकी बेटी की मौत हो जाती है. बेटी की मौत के बाद योगेश न्याय के लिए पुलिस और सिस्टम के पास जाता है, लेकिन उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया जाता.
हरित क्रांति के नाम पर जहर
टीजर में एक डायलॉग है, योगेश (श्रेयस तलपड़े) कहते हैं, ‘हरित क्रांति के नाम पर जो जहर का तूफान उठा है, वो रुकने का नाम ही नहीं रहा है.’
