फिल्म- पेड्डी
निर्देशक- बुची बाबू सना
कलाकार- राम चरण, शिवा राजकुमार, जान्हवी कपूर, जगपति बाबू, दिव्येंदु और बोमन ईरानी
प्लेटफार्म- सिनेमाघर
रेटिंग- 4
Peddi Review: बहुत कम फिल्में ऐसी होती हैं, जो दर्शकों की आंखों में आंसू भी ला दें और उनसे थिएटर्स में सीटियां भी बजवा लें. ‘पेड्डी’ उन्हीं चुनिंदा और विरली फिल्मों में से एक है. डायरेक्टर बुची बाबू सना की यह लेटेस्ट फिल्म इमोशनल स्टोरीटेलिंग, स्पोर्ट्स ड्रामा, सोशल मैसेज और ब्लॉकबस्टर एंटरटेनमेंट को एक ऐसे शानदार सिनेमैटिक एक्सपीरियंस में पिरोती है, जिसकी रफ्तार कहीं भी धीमी नहीं पड़ती. इतने बड़े स्केल की कहानी को संभालने में डायरेक्टर ने कमाल का कॉन्फिडेंस दिखाया है.
कैसी है राम चरण की पेड्डी मूवी
इस पूरी फिल्म की कमान राम चरण के हाथों में है, जिन्होंने ऐसा अभिनय किया है जिसकी हर तरफ जमकर तारीफ होनी चाहिए. पेड्डी के किरदार में उन्होंने एक आम इंसान की संवेदनशीलता को भी दिखाया है और एक लार्जर-दैन-लाइफ हीरो की दमदार मौजूदगी को भी. उनका यह परफॉर्मेंस पूरी फिल्म की असली रीढ़ की हड्डी है.
पेड्डी की क्या है सबसे बड़ी ताकत
‘पेड्डी’ की सबसे बड़ी ताकत इसकी भावनात्मक सच्चाई है. फिल्म आत्मसम्मान, संघर्ष और अपने समाज से जुड़े मूल मुद्दों को पूरी ईमानदारी से सामने रखती है. यही कारण है कि इसके सबसे भव्य और रोमांचक सीन्स भी जबरन गढ़े हुए नहीं लगते, बल्कि कहानी और किरदारों की यात्रा का स्वाभाविक और पूरी तरह अर्जित परिणाम महसूस होते हैं.
इमोशनल एंगल लेकर आती है पेड्डी
फिल्म के स्पोर्ट्स-ड्रामा वाले हिस्से पिछले कुछ समय में आए सबसे बेहतरीन सीन्स में से एक हैं. वैसे तो इस जॉनर में ‘दंगल’ और ‘सुल्तान’ जैसी कई यादगार फिल्में बनी हैं, लेकिन ‘पेड्डी’ एक नया इमोशनल एंगल लेकर आती है, जो इसे बाकी सब से बिल्कुल अलग खड़ा करता है. यहां खेल के मैदान की जीत सिर्फ एक कॉम्पिटिशन नहीं, बल्कि उससे कहीं बड़ी लड़ाई का प्रतीक बन जाती है.
सीन्स थिएटर्स में जश्न मनाने के लिए किए गए डिजाइन
विजुअली यह फिल्म बेहद ग्रैंड और शानदार है. हर एक फ्रेम में वो स्केल नजर आता है जो एक बड़ी इवेंट फिल्म से उम्मीद की जाती है, लेकिन इसके बावजूद कहानी का इमोशनल कनेक्शन शुरू से अंत तक बना रहता है. थिएटर्स में दर्शकों का रिस्पॉन्स ऐसा होगा जो आंसुओं और तालियों के बीच बंटा नजर आएगा. फिल्म के कई सीन्स सीधे दिल को छू लेते हैं और आपको भावुक कर देते हैं, तो वहीं कई सीन्स थिएटर्स में जश्न मनाने के लिए डिजाइन किए गए हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि इनमें से कुछ भी जबरदस्ती ठूंसा हुआ नहीं लगता.
कमर्शियल एंटरटेनर लगती है फिल्म
आज के फिल्म बिजनेस में जहां फिल्में अक्सर कंटेंट-ड्रिवन (गहरी कहानी वाली) और कमर्शियल एंटरटेनर (मसाला फिल्मों) के बीच बंटी नजर आती हैं, वहीं ‘पेड्डी’ पूरे आत्मविश्वास के साथ इन दोनों के बीच के फासले को मिटा देती है. यह फिल्म इंस्पायरिंग है, इमोशनल है, थ्रिलिंग है और पूरी तरह से सिनेमा के मजे से भरपूर है, एक ऐसी फिल्म जो गर्व से यह दिखाती है कि जब बेहतरीन कहानी और भव्यता एक साथ मिल जाएं, तो भारतीय सिनेमा क्या कमाल कर सकता है.
यह भी पढ़ें- Peddi Twitter Review: राम चरण की ‘पेड्डी’ दर्शकों को पसंद आई या नहीं? सामने आए रिव्यू
