भोला के विलेन दीपक डोबरियाल का कमरा देख गुस्से से आग-बबूला हो गए थे उनके पिता, वजह जान हैरान रह जाएंगे!

दीपक डोबरियाल ने अपनी पहचान बनाने में कड़ी मेहनत की है. हालांकि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने काफी स्ट्रगल भी की है. एक्टर ने बताया, जब वो मुंबई में संघर्ष कर रहे थे तो 6 लोगों के साथ एक कमरे में रहते थे.

दीपक डोबरियाल को दर्शकों ने कॉमेडी रोल्स में ज्यादा देखा है. भोला में उनका विलेन रूप देखकर एक पल के लिए फैंस हैरान हो गए. भोला जल्द ही 100 करोड़ के क्लब में एंट्री करने वाली है. इस बीच हर कोई उनकी दमदार एक्टिंग की तारीफ कर रहा है. लेकिन क्या आपको पता है एक बार मुंबई में उनके कमरे को देखकर उनके पिता गुस्से से लाल हो गए थे.

दीपक डोबरियाल के पिता बेटे को ऐसे देख हो गए हैरान

दीपक डोबरियाल ने अपनी पहचान बनाने में कड़ी मेहनत की है. हालांकि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने काफी स्ट्रगल भी की है. आजतक से खास बातचीत में एक्टर ने स्ट्रगल के दिनों के बारे में बताया. एक्टर ने बताया, जब वो मुंबई में संघर्ष कर रहे थे तो 6 लोगों के साथ एक कमरे में रहते थे. एक बार उनके पिता अचानक वहां आ गए. उन्होंने देखा कि उनका बेटा ऐसे कमरे में रहता है जो काफी छोटा है. कमरा इतना छोटा था कि अगर आप करवट लो तो, उसका दरवाजा बन्द नहीं होता था.

दीपक डोबरियाल के पिता काफी हो गए थे गुस्सा

भोला के विलेन दीपक डोबरियाल ने बताया, उनकी हालत देखकर उनके पिता काफी गुस्सा हो गए थे. जिसके बाद उन्होंने कहा कि वो जिस घर का दरवाजा बंद न हो, वहां बरकत कैसे आएगी. साथ ही उन्हें अपने साथ वापस ले जाने की बात करने लगे. ये बात सुनने के बाद दीपक काफी डर गए थे और उन्होंने पीयूष मिश्रा की मदद ली. पीयूष ने उनके पिता को समझाते हुए कहा कि, वैसे मैं इसकी कोई गारंटी नहीं देता, लेकिन मेरे कहने पर एक और साल मौका दें. अगर कुछ नहीं हो पाया तो वो खुद आ जाएगा घर

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फिर ऐसे माने दीपक डोबरियाल के पिता

दीपक डोबरियाल के पिता पीयूष मिश्रा की काफी इज्जत करते थे, इसलिए वो मान गए. बता दें कि ओमकारा के बारे में बात करते हुए, दीपक ने कहा, “इससे मेरा संघर्ष समाप्त हो गया. ओमकारा के बाद मुझे ऑडिशन के लिए नहीं जाना पड़ा. निर्माता या निर्देशक ने मुझे फोन किया. ओमकारा से पहले, मैं संघर्षरत अभिनेताओं से कहता था कि ‘यह सिर्फ समय की बात है. कोई भी मुझे गंभीरता से नहीं लेता था, क्योंकि मैं भी एक स्ट्रगलर था. ओमकारा के बाद, मैंने फिल्मफेयर जीता और फिर उन्होंने मेरी बातों को गंभीरता से लिया.

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Published by: Divya keshri

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शिक्षा और पत्रकारिता की शुरुआत

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