फिल्म देखने से पहले जानें कैसी है करण जौहर की "कलंक"

फ़िल्म कलंकनिर्देशक अभिषेक बर्मननिर्माता करण जौहरकलाकार आलिया भट्ट,वरुण धवन,सोनाक्षी सिन्हा,माधुरी दीक्षित, संजय दत्त,आदित्य रॉय कपूर और अन्यरेटिंग ढाई ।। उर्मिला कोरी ।। अर्बन फिल्में बनाने में माहिर निर्माता- निर्देशक करण जौहर की फिल्म "कलंक" बतौर निर्माता पहली पीरियड ड्रामा फ़िल्म है. खबरें थी कि इस इंटेंस प्रेमकहानी को करण पिछले पंद्रह साल से बनाना चाहते […]

फ़िल्म कलंक
निर्देशक अभिषेक बर्मन
निर्माता करण जौहर
कलाकार आलिया भट्ट,वरुण धवन,सोनाक्षी सिन्हा,माधुरी दीक्षित, संजय दत्त,आदित्य रॉय कपूर और अन्य
रेटिंग ढाई

।। उर्मिला कोरी ।।
अर्बन फिल्में बनाने में माहिर निर्माता- निर्देशक करण जौहर की फिल्म "कलंक" बतौर निर्माता पहली पीरियड ड्रामा फ़िल्म है. खबरें थी कि इस इंटेंस प्रेमकहानी को करण पिछले पंद्रह साल से बनाना चाहते थे.नफरत और बदले के बीच पनपी यह प्रेमकहानी पिता यश जौहर के दिल के करीब भी थी. कहानी की बात करें, तो फ़िल्म की कहानी 40 के दशक पर आधारित है. आज़ादी के कुछ साल पहले की.
हुसंगाबाद मुस्लिम बहुल इलाका है लेकिन यहां पर सिक्का चौधरी परिवार का चलता है. सबकुछ ठीक चल रहा होता है लेकिन देव ( आदित्य) की दूसरी शादी से कहानी बदल जाती है. रूप (आदित्य) की दूसरी पत्नी है. उसकी शादी भले देव से हुई है लेकिन उसे प्यार जफर( वरुण धवन) से हो जाता है. उसके बाद प्यार को इंसान द्वारा बनाए गए जाति, धर्म और भी कई तरह की दीवारों और नियमों से गुजरना होता है. फ़िल्म में देव का एक संवाद है यदि किसी की पत्नी किसी दूसरे मर्द से प्यार करे, तो ऐसी शादी का क्या मतलब है. फ़िल्म का ये संवाद मूल कहानी के मर्म को समझा जाता है लेकिन कहानी में कुछ भी नयापन नहीं है.
हां ट्रीटमेंट ज़रूर अच्छा है लेकिन फ़िल्म का स्क्रीनप्ले फ़िल्म को बोझिल बना देता है.यह कहना गलत न होगा. कहानी और स्क्रीनप्ले पर काम करने की ज़रूरत थी . ये ऐसी चीज़ें हैं जो भव्यता या लार्जर देन लाइफ से छिपायी नहीं जा सकती.ये बातें फिल्मकारों को समझने की ज़रूरत है. फ़िल्म की एडिटिंग पर भी काम करने की ज़रूरत थी.अभिनय की बात करें तो फ़िल्म अपने मल्टीस्टारर की वजह से शुरू से चर्चा में थी.आलिया,वरुण ,माधुरी सहित सभी कलाकारों ने अच्छा काम किया है लेकिन बाज़ी आदित्य रॉय कपूर ने मारी है.उन्होंने बखूबी अपने किरदार के द्वंद को प्रस्तुत किया है. फ़िल्म की सिनेमेटोग्राफी अच्छी है लेकिन जिस दौर को दिखाया गया है उसके अनुसार फिट नहीं बैठते हैं.वे हकीकत से दूर दिखते हैIफ़िल्म का गीत संगीत अच्छा है.ओवरऑल यह फ़िल्म नाम बड़े दर्शन छोटे वाला ही मामला साबित होती है.

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