।। बुधमनी ।।
गुजरे जमाने में भाई-बहनों के रिश्ते बड़े पर्दे पर बड़ी ही खूबसूरती और मजबूती से दिखाया गया है. जैसे ही राखी का त्योहार करीब आने लगता है रेडियो और टीवी पर भाई बहन के अटूट प्यार को दर्शाने वाले गीतों का सिलसिला शुरू हो जाता है. ‘इसे समझो न रेशम का तार भैय्या’, ‘बहना ने भाई की कलाई पे’ और ‘भैय्या मेरे राखी के बंधन’ जैसे गाने अपनेआप दिमाग में चलने लगते है. लेकिन समय बीतने के साथ-साथ बड़े पर्दे पर भाई-बहन पर आधारित फिल्में लगभग बनना बंद हो गये हैं और ऐसी नयी धुनें भी सुनने को नहीं मिलती.
इंडस्ट्री में अब इस सब्जेक्ट पर फिल्म लगभग बंद हो गया है. आज से दस-पंद्रह साल पहले के सिनेमा को देखे तो उसमें भाई-बहन का प्यार और मां की ममता दोनो होते थे जो आडियंस को भावुक कर देते थे. लेकिन वहीं इसके उलट आज सिनेमा से भाई-बहन के रिश्ता कहीं दूर होता जा रहा है.
इंडस्ट्री में मां-बेटी, बाप बेटी को लेकर भी कई फिल्में बन चुकी है और लगातार बन भी रही है. जिसका उदाहरण ‘दंगल’, ‘मॉम’, ‘मातृ’ है जो हाल ही में रिलीज हुई थी. हाल ही वर्षो में इंडस्ट्री में हर साल कितनी ही फिल्में बनती है लेकिन भाई-बहन का सब्जेक्ट सबसे अछूता है. राजनीति से लेकर रोमांस तक, थ्रिलर से हॉरर तक, बायोपिक से लेकर सच्ची कहानियों तक पूरे साल भर कई फिल्में बनती है लेकिन भाई-बहनों या राखी के महत्व को समझाती फिल्में आजकल कोई फिल्मकार नहीं बनाता.
ऐसे में क्या ऐसा कहा जा सकता है कि बॉलीवुड इंडस्ट्री में भाई-बहन का रिश्ता मर गया है. क्यों किसी फिल्मकार की नजर इस ओर नहीं आती. यहां हम वर्तमान फिल्मों की बुराई नहीं कर रहे हैं ना ही उनमें कोई दोष है बल्कि अब फिल्में ज्यादा स्वतंत्र हुई हैं.
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अब भी भाई-बहन से जुड़ी फिल्मों की बात हो या फिर उनसे जुड़े गीत, पुरानी फिल्मों के ही उदाहरण दिये जाते हैं. पुराने नगमों से ही रक्षा बंधन की शुरुआत होती है और आज भी उन गीतों और फिल्मों की एक खास जगह है.
मनोज कुमार अभिनीत फिल्म ‘बेईमान’ मे ही देखा जाए तो एक गाना है ‘ये राखी बंधन है ऐसा’ जिसे सुनकर और देखकर राखी का पूरा यर्थाथ हमारे सामने आ जाता हैं और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की एक झलक दिखती है. ऐसे ही सिनेमा ने कई बार इस पवित्र और पावन रिश्ते को रंगमंच के पर्दे पर उकेरने की कोशिश की. महानायक अमिताभ बच्चन के अभिनय से सजी फिल्म मजबूर का गीत ‘नहीं मै नहीं देख सकता तुझे रोते हुए’ सुनने वालों की आंखू में आंसू ला देता हैं.
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1971 में आई फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ में देवानंद और फिल्म में उनकी बहन का किरदार निभा रही जीनत अमान ने दर्शकों का खूब दिल जीता था. इस फिल्म को देवानंद ने निर्देशित किया था. फिल्म को जबरदस्त कामयाबी मिली थी. फिल्म में जीनत ने एक नशे में रहने वाली युवती का किरदार निभाया था. फिल्म में भाई-बहन के प्यार के रिश्तें को बखूबी दर्शाया गया था. इस फिल्म को आज भी खूब पसंद किया जाता था.
2000 में आई फिल्म ‘जोश’ गोवा के दो लोकल गैंग के बीच प्रतिद्वंद पर आधारित थी, जिसमें एक गैंग के लीडर की बहन को दूसरे गैंग के लीडर के भाई से प्यार हो जाता है. शाहरुख़ खान और ऐश्वर्या राय बच्चन ने फिल्म में भाई बहन का किरदार निभाया था. मैक्स जिसके डर से गोवा का एक तबका कांपता है, किस तरह से अपनी बहन से प्यार जताता है यही दिखाया है इस फिल्म में.
साल 2006 में आई फिल्म ‘चुप चुप के’ दो कारणों से खूब फेमस रही. एक कॉमेडी और दूसरा सुनील शेट्टी और करीना कपूर के बीच का बंधन. फिल्म में बखूबी दिखाया गया था कि कैसे भाई (सुनील शेट्टी) अपनी गूंगी बहन (करीना कपूर) का ख्याल रखता है और बहन की आंखों में आंसू आ जाये तो पूरा आसमान सिर पर उठा लेता है. बॉलीवुड आज चाहे कितना ही बदल गया हो पर सिनेमा जगत के ये गीत और ये फिल्मे रक्षाबंधन के त्यौहार को यूं ही फिल्मों में जिंदा रखेंगे.
