Awarapan 2 Movie Review: नास्टैल्जिया फैक्टर के बावजूद कहानी कमजोर लेकिन इमरान हाशमी दमदार

फिल्म की शुरुआत बहुत ही एंगेजिंग तरीके से हुई है. शुरुआत के बीस मिनट फिल्म को पूरा सेट कर दिया है लेकिन उसके बाद कहानी का प्रभाव कमतर होता गया है.फिल्म प्रेडिक्टेबल है. फिल्म से जुड़े ट्विस्ट आपको चौंकाते नहीं हैं लेकिन इमरान हाशमी ने शिवम् पंडित के तौर पर दमदार वापसी की है. इससे इंकार नहीं है.

फिल्म -आवारापन 2

निर्माता - विशेष फिल्म्स

निर्देशक - नितिन कक्कड़

कलाकार -इमरान हाशमी, दिशा पाटनी,शबाना आजमी,पूरण गब्बी, सुरेंद्र विक्की, विजेंद्र कोहली

प्लेटफार्म -सिनेमाघर

रेटिंग -ढाई

awarapan 2 movie review :सुपरहिट फिल्मों के सीक्वल का फार्मूला हिंदी सिनेमा में इनदिनों टिकट खिड़की पर दर्शकों को बटोरने का जरिया बन गया है लेकिन आज रिलीज हुई फिल्म आवारापन 2 इस मामले में अलहदा है. 2007 में रिलीज हुई आवारापन बॉक्स ऑफिस पर असफल साबित हुई थी लेकिन बाद में टेलीविज़न और यूट्यूब के जरिये से इस फिल्म के संगीत और शिवम् पंडित के अधूरे प्यार ने लोगों के दिलों में इस कदर जगह बनायी कि फिल्म ने कल्ट क्लासिक का दर्जा पा लिया. यही वजह है कि मेकर्स ने 19 साल के लम्बे अंतराल के बाद इस फिल्म का सीक्वल रिलीज किया. शिवम पंडित का दर्द ,अधूरापन क्या इस बार थिएटर्स तक दर्शकों को ला पायेगा. जानने के लिए पढ़ें ये रिव्यु

ये है कहानी

आवारापन की कहानी जहाँ खत्म हुई थी,वहीँ से पार्ट 2 की शुरू होती है. इस फिल्म को पूरी तरह से एन्जॉय करने के लिए आवारापन का पहला भाग देखना ज़रूरी है क्योंकि शिवम् पंडित का अतीत इस फ़िल्म में लगातार आता रहता है. मौजूदा कहानी पर आए तो शिवम पंडित ( इमरान हाशमी )ने मौत को मात दे दी है लेकिन अपने अतीत के दर्द से अब तक पीछा नहीं छुड़ा पाया है. आलिया हमीद ( श्रेया) की यादों से वह अब भी जूझ रहा है . एक अनाथ बच्ची आलिया (मायरा) का साथ उसे थोड़ी राहत देता है, लेकिन हालात कुछ ऐसे बनते हैं कि आलिया ह्यूमन ट्रैफिकिंग के रैकेट में फँस जाती है.आलिया को बचाने के लिए एक बार फिर शिवम पंडित अपराध की दुनिया में लौटता है. क्या इस बार वह आलिया को बचा पाएगा. क्या ह्यूमन ट्रैफ़िकिंग के मास्टरमाइंड तक वह पहुंच पाएगा. यही आगे की कहानी है .

आवारापन 2 फिल्म का पोस्टर, फोटो- इंस्टाग्राम

आवारापन ३ की बारी !

फिल्म की शुरुआत बहुत ही एंगेजिंग तरीके से हुई है. शुरुआत के बीस मिनट फिल्म को पूरा सेट कर दिया है लेकिन उसके बाद कहानी का प्रभाव कमतर होता गया है.फिल्म प्रेडिक्टेबल है. फिल्म से जुड़े ट्विस्ट आपको चौंकाते नहीं है,फ़िल्म का दूसरा भाग ज़रूरत से ज़्यादा खींच गया है.फ़िल्म पर थोड़ी कैंची चलाने की ज़रूरत थी. उससे शायद फ़िल्म का प्रभाव बढ़ सकता था.क्लाइमेक्स अधूरापन लिए हैं. जो कई दर्शकों को पसंद नहीं भी आ सकता है. वैसे इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है . इस तरह की एंडिंग शायद तीसरे पार्ट की तैयारी भी हो सकती है. फिल्म के ट्रीटमेंट में भी नास्टैल्जिया  फैक्टर का जमकर इस्तेमाल हुआ है..डार्क कलर पैलेट में ही फिल्म रंगी नज़र आयी है. फिल्म में एक्शन का स्तर पिछली फिल्म के मुकाबले बेहतर है.

शबाना आज़मी का कम स्क्रीन स्पेस अखरता है

इस फिल्म को इमरान हाशमी बनाम शबाना आज़मी कहकर प्रचारित किया गया था, फिल्म में शबाना आजमी को बहुत कम स्क्रीन स्पेस मिला है. यह पहलू फ़िल्म का बहुत खलता है .हालांकि वह जब भी परदे पर दिखती हैं। फिल्म का प्रभाव बढ़ जाता है। सुरिंदर विक्की और विजयंत कोहली का काम अच्छा है लेकिन शबाना सहित उनके किरदारों में गहराई की जरूरत थी .

कम्पोजर्स की भीड़ लेकिन नया संगीत बेअसर

आवारापन फिल्म की अहम यूएसपी फिल्म का संगीत था.उन्नीस साल बाद भी इसका गीत संगीत श्रोताओं की जुबान पर चढ़ा हुआ है। पिछली बार फिल्म के संगीत से प्रीतम का नाम जुड़ा हुआ था. इस बार कंपोजर्स की फ़ौज है, जिसमें मिथुन, जीत गांगुली, अमाल मलिक,अंकित सचदेवा और वासिफ अहमद जैसे नाम शामिल हैं लेकिन नए गाने बेअसर रह गए हैं.फिल्म के म्यूजिक में भी पुराने गाने वाले नॉस्टल्जिया ही काम आया है. तो फिर आओ और तेरा मेरा रिश्ता एक फिर से दिल से आसानी से रिश्ता बना जाता है .

इमरान हाशमी चमके

वेब सीरीज द बैड्स ऑफ़ बॉलीवुड में राघव जुयाल का एक डायलॉग है कि अक्खा बॉलीवुड एक तरफ़ और इमरान हाशमी एक तरफ़ .इस फ़िल्म में वह उस डायलॉग को पूरी तरह से चरितार्थ करते नज़र आए हैं .शिवम् पंडित के किरदार को एक बार फिर उन्होंने अपनी आँखों और ख़ामोशी के साथ गढ़ा है . जो उनके मिलेनियल्स फैंस के लिए निश्चिततौर पर ट्रीट की तरह है.इसके साथ ही किरदार के लिए उनका बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन उसे  और ख़ास बनाता है. पूरण गब्बी ने साइकोपैथ की भूमिका में मेहनत तो की है लेकिन पर्दे पर वह दहशत पैदा नहीं कर पाये हैं ,जो किरदार की माँग थी अभिनेत्री दिशा पाटनी ने एक बार फिर अभिनय से ज़्यादा फ़िल्म में ग्लैमर के जिम्मे को संभाल रखा है .फिल्म में श्रेया शरण और जय रंधावा का कैमियो यादगार है.


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लेखक के बारे में

By Urmila Kori

I am an entertainment lifestyle journalist working for Prabhat Khabar for the last 14 years. Covering from live events to film press shows to taking interviews of celebrities and many more has been my forte. I am also doing a lot of feature-based stories on the industry on the basis of expert opinions from the insiders of the industry.
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