15 अगस्त Special: वो 6 फिल्में, जो 1947 के बंटवारे के अनकहे आंसू और खौफनाक सच दिखाती हैं

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15 अगस्त Special: वो 6 फिल्में, जो 1947 के बंटवारे के अनकहे आंसू और खौफनाक सच दिखाती हैं
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फिल्में जो बंटवारे का दर्द बयां करती हैं , फोटो- इंस्टाग्राम

1947 के बंटवारे ने सिर्फ नक्शे पर लकीरें नहीं खींचीं, बल्कि करोड़ों दिल और रिश्ते बांट दिए. 'गदर' से लेकर 'पिंजर' और 'तमस' तक - देखिए सिनेमा के आईने में विभाजन के उस अनकहे दर्द, संघर्ष और मानवीय आंसुओं की दास्तान.

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बटवारे की फिल्में, फोटो इंस्टाग्राम

15 अगस्त (Independence Day) - फिल्में जो बंटवारे का दर्द बयां करती हैं

जब देश आजाद हुआ, तो नक्शे पर खींची लकीरों ने लाखों घर, रिश्ते और दिल बांट दिए। इस स्वतंत्रता दिवस, आजादी के जश्न के साथ-साथ महसूस कीजिए उन अनकहे आंसुओं और संघर्षों को, सिनेमा के इस खास आईने से.

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गदर: एक प्रेम कथा, फोटो- इंस्टाग्राम

गदर: एक प्रेम कथा (Gadar: Ek Prem Katha)

सनी देओल और अमीषा पटेल की फिल्म ‘गदर: एक प्रेम कथा’ भारत-पाकिस्तान विभाजन की पृष्ठभूमि पर बनी लोकप्रिय फिल्मों में से एक है. कहानी तारा सिंह और सकीना के प्यार के इर्द-गिर्द घूमती है. विभाजन के दौरान सकीना पाकिस्तान में रह जाती है, जिसके बाद तारा सिंह उसे वापस भारत लाने के लिए सीमा पार जाता है. फिल्म में बंटवारे के दौरान हुए दंगों, परिवारों के बिछड़ने और लोगों के संघर्ष को भी दिखाया गया है.

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मैं वापस आऊंगा, फोटो- इंस्टाग्राम

मैं वापस आऊंगा (Main Vaapas Aaunga)

मैं वापस आऊंगा विभाजन की त्रासदी और उससे जुड़े मानवीय रिश्तों को सामने लाने वाली कहानी है. फिल्म की कहानी उन लोगों के दर्द और संघर्ष को दिखाती है, जिन्हें 1947 के बंटवारे के कारण अपना घर और अपनों को छोड़ना पड़ा. इसमें विस्थापन, यादों और अपने पुराने जीवन में लौटने की उम्मीद जैसे भावनात्मक पहलुओं को प्रमुखता दी गई है. फिल्म यह बताती है कि राजनीतिक फैसलों का आम लोगों की जिंदगी पर कितना गहरा असर पड़ सकता है.

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पिंजर, फोटो- इंस्टाग्राम

पिंजर (Pinjar)

‘पिंजर’ अमृता प्रीतम के चर्चित उपन्यास पर आधारित फिल्म है, जिसमें 1947 के विभाजन के दौरान महिलाओं की स्थिति और उनके संघर्ष को दिखाया गया है. कहानी पूरो नाम की एक युवती की है, जिसकी जिंदगी बंटवारे के कारण पूरी तरह बदल जाती है. फिल्म में धर्म, पहचान, परिवार और इंसानियत के बीच के संघर्ष को दिखाया गया है। यह फिल्म बताती है कि विभाजन की हिंसा का सबसे गहरा असर महिलाओं और परिवारों पर पड़ा.

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अर्थ, फोटो- इंस्टाग्राम

अर्थ, (Earth)

दीपा मेहता की फिल्म ‘Earth’ 1947 के विभाजन की पृष्ठभूमि में बनी कहानी है. फिल्म एक बच्ची की नजर से उस दौर को दिखाती है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव ने लोगों के रिश्तों को प्रभावित करना शुरू किया. अलग-अलग धर्मों के दोस्तों के बीच पैदा होने वाला अविश्वास और हिंसा धीरे-धीरे उनकी जिंदगी बदल देती है. फिल्म मासूमियत, दोस्ती और इंसानी रिश्तों पर विभाजन के भयावह असर को सामने लाती है.

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खामोश पानी, फोटो- इंस्टाग्राम

खामोश पानी (Khamosh Pani)

पाकिस्तानी फिल्म ‘Khamosh Pani’ विभाजन के कई साल बाद उसके बचे हुए घावों की कहानी बताती है. फिल्म की कहानी एक विधवा महिला और उसके बेटे के इर्द-गिर्द घूमती है. 1979 में पाकिस्तान में बढ़ते धार्मिक कट्टरवाद के बीच उसके अतीत के कुछ राज सामने आते हैं. फिल्म यह दिखाती है कि 1947 का विभाजन सिर्फ सीमाओं और देशों का बंटवारा नहीं था, बल्कि इसका असर लोगों की पहचान, रिश्तों और आने वाली पीढ़ियों तक रहा.

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तमस, फोटो- इंस्टाग्राम

तमस (Tamas)

तमस' (1987) गोविंद निहलानी द्वारा निर्देशित एक कालजयी और मार्मिक फिल्म है, जो भीष्म साहनी के इसी नाम के प्रसिद्ध उपन्यास पर आधारित है. यह कहानी 1947 में भारत के विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जो दर्शाती है कि कैसे राजनीतिक और सांप्रदायिक ताकतें साधारण इंसानों को नफरत और हिंसा की आग में झोंक देती हैं. फिल्म में नत्थू (ओम पुरी) जैसे मासूम लोगों के शोषण, सांप्रदायिक दंगों के दर्द और लाखों बेघर शरणार्थियों की त्रासदी को बेहद संजीदगी व सच्चाई के साथ पेश किया गया है. यह विभाजन के मानवीय दर्द का एक जीवंत और झकझोर देने वाला दस्तावेज है.

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लेखक के बारे में

By आशा कुमारी

आशा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में एंटरटेनमेंट कंटेंट राइटर हैं. वह बॉलीवुड, साउथ सिनेमा, OTT, बॉक्स ऑफिस, टीवी शोज और सोशल मीडिया पर वायरल एंटरटेनमेंट अपडेट्स कवर करती हैं. उनकी कोशिश यही रहती है कि हर बड़ी एंटरटेनमेंट खबर पूरी फैक्ट-चेकिंग, सटीक जानकारी और आसान भाषा के साथ सबसे पहले पाठकों तक पहुंचाई जाए.

आशा को एंटरटेनमेंट बीट हमेशा से पसंद रहा है, इसलिए वह एंटरटेनमेंट की हर बड़ी खबर, ट्रेंडिंग और महत्वपूर्ण अपडेट्स पर नजर रखती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि खबरें सिर्फ जानकारी तक सीमित न रहें, बल्कि दिलचस्प और आसान भाषा में हों, ताकि रीडर्स इनसे जुड़ाव महसूस करें.

शिक्षा (Education)

झारखंड की रहने वाली आशा ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC), दिल्ली से इंग्लिश जर्नलिज्म में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है.

पत्रकारिता की शुरुआत 

आशा को कंटेंट राइटिंग में ढाई साल का अनुभव है. अपने करियर की शुरुआत उन्होंने ‘द पैम्फलेट’ (The Pamphlet) में न्यूज राइटर के तौर पर की थी. इसके बाद उन्होंने आउटलुक (Outlook) में लाइफस्टाइल कंटेंट राइटर के तौर पर काम किया. इसके साथ ही, आशा ने ईटीवी भारत (ETV Bharat) और हिंदुस्तान टाइम्स (Hindustan Times) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में इंग्लिश कंटेंट राइटर के रूप में अपना योगदान दिया है.

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