संजय कुमार
दानापुर : एक बहुप्रतिभा धनी महिला जो अभिनेत्री हैं, नृत्यांगना हैं. शास्त्रीय संगीत की गायिका भी हैं. कैनवास पर कूचियां भी बड़ी खूबसूरती से चलाती हैं. वे कला की इन खूबियों को अपने तक समेट कर रखना नही चाहती हैं. चाहती हैं कि हर घर में संगीत की गूंज हो. हर दिल में संगीत हो. ये बहुप्रतिभा धनी महिला हैं प्रदेश की वरिष्ठ कलाकार राखी नियोगी चौधरी. कला के प्रति उनके समर्पण को देखकर बिहार आर्ट थिएटर ने पिछले वर्ष इन्हें अनिल मुखर्जी कला शिखर सम्मान से नवाजा है.
कला की कई विधा में पारंगत
राखी बचपन से ही संगीत के माहौल में पली-बढ़ीं. गर्दनीबाग स्थित घर में शास्त्रीय संगीत का माहौल था. संगीतज्ञ पिता दिलीप कुमार नियोगी से शास्त्रीय गायन की शुरुआती तालिम हासिल की. फिर चर्चित संगीतज्ञ श्यामदास मिश्र, असीत चक्रवर्ती और चिन्मय बनर्जी से गायन में पारगंत हासिल की. शास्त्रीय नृत्य कथक में प्रदेश की जानी मानी नृत्यांगना नीलम चौधरी से तालीम पायी. पेंटिंग में भी गहरी पैठ बनायी. नृत्य नाटिका चंडालिका में उनके अभिनय व नृत्य ने दर्शकों के साथ समीक्षकों को भी प्रभावित किया. इस नृत्य नाटिका के साथ केसरिया महोत्सव में भी शरीक हुई थीं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आज भी वे सीखने के लिए तत्पर रहती हैं.
गरीब बच्चों को देतीं हैं संगीत की नि:शुल्क शिक्षा
गरीब बच्चों को राखी नि:शुल्क संगीत की शिक्षा दे रही हैं. अपने ससुर राजेंद्र चौधरी द्वारा 1980 में स्थापित सांस्कृतिक संस्था कलाकृति को भी अपने संगीतज्ञ पति के साथ मिलकर आगे बढ़ा रही हैं. उन्होंने बताया कि दो बच्चे गुंजन और पुखराज कोरियोग्राफी के क्षेत्र में अच्छा कर रहे हैं. राखी का मानना है कि संगीत ईश्वर की आराधना का सशक्त माध्यम भी है.
