Narendra Modi Cabinet : नरेंद्र मोदी के ये 15 ‘सिपहसालार’ हार गए चुनाव, यूपी से ही छह मंत्री शामिल

लोकसभा चुनाव 2024 में नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल के 15 मंत्री चुनाव हार गए. यह एक बड़ा झटका है. उत्तर प्रदेश से ही सिर्फ 6 मंत्री चुनाव हारे हैं.

Narendra Modi Cabinet : लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम में कई ऐसी बाते हैं, जिनपर गौर किया जाना चाहिए. ऐसा ही एक परिणाम है केंद्रीय मंत्रियों का हारना. 4 जून को जब लोकसभा चुनाव के परिणाम सामने आने लगे तो किसी ने यह नहीं सोचा था कि स्मृति ईरानी, आरके सिंह और राजीव चंद्रशेखर जैसे नेता चुनाव हार जाएंगे, लेकिन जब अंतिम परिणाम सामने आए, तो वे चौंकाने वाले थे. स्मृति ईरानी जैसी तेज-तर्रार नेता भी किसी राउंड में बढ़त नहीं बना सकीं. लोकसभा चुनाव में कुल 15 केंद्रीय मंत्री चुनाव हार गए, जिनमें से छह सिर्फ उत्तर प्रदेश से थे. तो आइए जानते हैं कौन-कौन से केंद्रीय मंत्री चुनाव हार गए और हार की वजह क्या रही:-

स्मृति ईरानी की हार ने चौंकाया

स्मृति ईरानी : उत्तर प्रदेश के अमेठी लोकसभा क्षेत्र से केंद्रीय मंत्री और 2019 के चुनाव में अमेठी से राहुल गांधी को बुरी तरह पराजित करने वाली स्मृति ईरानी चुनाव मैदान में थीं. उनके सामने कांग्रेस के प्रत्याशी किशोरी लाल शर्मा थे. किशोरी लाल कांग्रेस के पुराने नेता हैं और उन्हें गांधी परिवार का पुराना दरबारी भी माना जाता रहा है. राहुल गांधी ने रायबरेली से चुनाव लड़ने का फैसला किया, तो अमेठी में किशोरी लाल शर्मा को मौका दिया गया, वे अमेठी में जमीनी स्तर पर काम कर चुके थे. संभवत: स्मृति ने उन्हें हल्के में लिया और यही वजह है कि वो 167196 वोट के मार्जिन से चुनाव हार गईं. स्मृति ईरानी केंद्रीय मंत्रिपरिषद में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय संभाल रही थीं.

विवादों में रहे अजय मिश्रा टेनी

अजय मिश्रा टेनी : केंद्रीय गृहराज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी को खीरी लोकसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के उत्कर्ष वर्मा ने शिकस्त दी. उत्कर्ष वर्मा ने अजय मिश्रा टेनी को 32329 वोटों के मार्जिन से हराया. अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा ने 2021 में एक गांव में कुछ लोगों पर उनकी गाड़ी चढ़ा दी थी, जिसमें चार किसानों की मौत हुई थी, यह मामला काफी गरमाया था और इससे अजय मिश्रा पर भी सवाल उठे थे, संभवत: इस कांड ने उनकी हार की कहानी लिख दी.

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दो बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे अर्जुन मुंडा भी हारे

अर्जुन मुंडा : कृषि और जनजातीय कल्याण विभाग के मंत्री अर्जुन मुंडा झारखंड के खूंटी लोकसभा क्षेत्र से चुनाव हार गए. उन्हें कांग्रेस के काली चरण मुंडा ने लगभग डेढ़ लाख वोटों के अंतर से हराया. जानकारों का मानना है कि यहां काली चरण मुंडा ने जमीन पर काफी काम किया और आम लोगों से जुड़े. यह ट्राइबल रिजर्व सीट है. अर्जुन मुंडा झारखंड के मुख्यमंत्री भी रहे हैं, बावजूद वे चुनाव हार गए.

आक्रामक छवि रही है निरंजन ज्योति की

साध्वी निरंजन ज्योति : फतेहपुर लोकसभा सीट से बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति चुनाव हार गईं. उन्हें समाजवादी पार्टी के नेता नरेश चंद्र उत्तम ने 33 हजार से अधिक वोटों से हराया. निरंजन ज्योति की छवि एक आक्रामक हिंदूवादी नेता की रही है, उनके हार के कारणों में यह बताया जा रहा है कि वे पार्टी के अपने लोगों की वजह से ही चुनाव हार गई.

24 हजार वोटों के अंतर से हारे संजीव बालियान

संजीव बालियान : संजीव बलियान को समाजवादी पार्टी के नेता हरेंद्र सिंह मलिक ने चुनाव हराया. संजीव बलियान मोदी सरकार में कृषि राज्य मंत्री रहे हैं. उन्हें हरेंद्र सिंह ने 24 हजार वोटों के अंतर से हराया. संजीव बलियान को 41.35 और मलिक को 43.64 प्रतिशत वोट मिले.

कैलाश चौधरी तीसरे स्थान पर रहे

कैलाश चौधरी : राजस्थान के बाड़मेर लोकसभा क्षेत्र से किसान और कृषि कल्याण विभाग के राज्यमंत्री कैलाश चौधरी चुनाव हार गए. उन्हें कांग्रेस पार्टी के उम्मेदा राम बेनीवाल ने चुनाव हरा दिया. यहां त्रिकोणीय मुकाबला था और कांग्रेस, बीजेपी और निर्दलीय प्रत्याशी रविंद्र सिंह भट्टी चुनावी मुकाबले में थे. केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी तीसरे नंबर पर रहे.

राजीव चंद्रशेखर को शशि थरूर ने हराया

राजीव चंद्रशेखर : बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर तिरुवनंतपुरम सीट से कांग्रेस नेता शशि थरूर से चुनाव हार गए. उन्होंने शशि थरूर को कांटे की टक्कर तो दी,लेकिन वे चुनाव जीत नहीं सके. वे 16077 वोट के अंतर से पराजित हुए.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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