Vijender Chauhan on UPSC Prelims: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की CSE Prelims परीक्षा को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है. इस बार परीक्षा में पूछे गए सवाल सिलेबस से अलग थे. कई सवाल ने छात्रों और एक्सपर्ट को हैरान कर दिया. इसी मुद्दे पर UPSC इंटरव्यू बोर्ड में शामिल रह चुके और जाने-माने एजुकेटर डॉ. विजेंद्र सिंह चौहान ने अपनी राय दी है. उन्होंने कहा कि UPSC युवाओं के साथ छुपन-छुपाई खेल रही है.
यूपीएससी छात्रों को धप्पा कर रही
उन्होंने कहा कि UPSC अब युवाओं के साथ “छुपन-छुपाई” का खेल खेल रही है. उनके मुताबिक परीक्षा कठिन होना जरूरी है, लेकिन कठिन और बेतुका होने में फर्क होता है. कहा कि जाहिर है यूपीएससी जैसी परीक्षा टफ होगी और होनी भी चाहिए. लेकिन क्या टफ होने और बेतूका होने में अंतर नहीं होता? ऐसा लग रहा है जैसे UPSC अस्पिरेंट्स के साथ धप्पा खेलने की कोशिश कर रही है.
बुक से ज्यादा फायदा सरकारी प्रेस रिलीज से हो रहा है
उन्होंने कहा कि लाखों छात्र वर्षों तक मेहनत करते हैं, लेकिन इस बार का पेपर देखकर ऐसा लगता है कि अनप्रेडिक्टेबिलिटी को ही कठिनाई मान लिया गया है. उन्होंने परीक्षा के बदलते पैटर्न पर चिंता जताते हुए कहा कि अब ट्रेडिशिनल किताबों से ज्यादा फायदा सरकारी प्रेस रिलीज पढ़ने से हो रहा है. लक्ष्मीकांत और अन्य किताबें पढ़ने से ज्यादा PIB की प्रेस रिलीज को देखना जरूरी हो गया है.
स्टूडेंट्स की बुद्धि को रिवार्ड नहीं मिल रहा
उनके मुताबिक यह बदलाव परीक्षा के मूल उद्देश्य को प्रभावित कर सकता है. स्टूडेंट्स की बुद्धि को रिवार्ड नहीं मिल रहा है बल्कि सरकारी नीतियों के प्रति उनकी ईमानदारी को रिवार्ड मिलेगा. UPSC छात्रों का चरित्र बदलने की कोशिश कर रही है.
छात्रों के बीच छिड़ी बहस
UPSC Prelims 2026 के बाद सोशल मीडिया पर भी छात्रों ने पेपर को लेकर मिली-जुली फीडबैक दी है. कुछ छात्रों ने इसे सबसे अनप्रेडिक्टेबल पेपर बताया, जबकि कुछ का मानना है कि UPSC अब रटने की बजाय व्यापक समझ को टेस्ट कर रही है. हालांकि, विजेंद्र चौहान की टिप्पणी ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि आखिर UPSC को कठिन परीक्षा कहा जाए या अनप्रेडिक्टेबल.
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