लगातार हुए फेल, शादी तक टाल दी, आखिरी प्रयास में हासिल किया UPSC AIR 287

Jitendra Prajapati AIR 287: यूपीएससी एग्जाम की जिद क्या होती है जानना है तो जितेंद्र प्रजापति की कहानी जरूर पढ़ें. जितेंद्र ने लगातार कई असफलताओं के बाद भी हार नहीं मानी. अपने आखिरी प्रयास में उन्होंने यूपीएससी सिविल सर्विस की परीक्षा को रैंक 287 लाकर क्रैक किया है.

Jitendra Prajapati AIR 287: यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा में राजस्थान के रहने वाले जितेंद्र प्रजापति ने AIR 287 हासिल किया है. 8 बार लगातार मिल रही असफलताओं के बावजूद अपने लक्ष्य पर टिके रहें. आखिरकार अपने 9वें और लास्ट अटेम्प्ट में जितेंद्र ने यूपीएससी एग्जाम में सफलता पाई. जितेंद्र प्रजापति का यह लगातार प्रयास आज उन सभी युवा को हिम्मत देगी जो छोटी-मोटी मुश्किलों से घबराकर पीछे हट जाता है. आइए जितेंद्र (Jitendra Prajapati AIR 287) की जर्नी को करीब से जानते हैं.  

Jitendra Prajapati AIR 287: बालोतरा के एक साधारण परिवार का चमका सितारा

जितेंद्र प्रजापति राजस्थान के बालोतरा शहर के नयापुरा इलाके के रहने वाले हैं. एक बेहद साधारण परिवार से आने वाले जितेंद्र ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सर्विसेज परीक्षा में 287वीं रैंक हासिल की है. अपने नौवें और आखिरी प्रयास में मिली इस ऐतिहासिक सफलता ने न केवल जितेंद्र के परिवार को खुशियों से भर दिया है, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया है. 

जितेंद्र प्रजापति AIR 287 (Instagram)

पिता गुजरात में चलाते हैं कैंटीन, संघर्षों में बीता बचपन

जितेंद्र की इस सफलता के पीछे उनके पूरे परिवार का लंबा संघर्ष छिपा है. जितेंद्र के पिता मोतीलाल प्रजापति  गुजरात के गांधीधाम में एक प्राइवेट कंपनी के अंदर कैंटीन चलाते हैं. घर की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने बेटे की पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी. जितेंद्र पिछले 6 साल से दिल्ली के एक छोटे से कमरे में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे.

भाई संभालते हैं पिता का हाथ, बहन है चार्टर्ड अकाउंटेंट

जितेंद्र के परिवार में उनके माता-पिता के अलावा दो भाई और एक बहन हैं. घर को संभालने और जितेंद्र की पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए उनका बड़ा भाई भी पिता के साथ गुजरात में कैंटीन के काम में हाथ बंटाता है. वहीं, जितेंद्र की बहन एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) के रूप में काम कर रही हैं. 

8 बार की नाकामियों को पीछे छोड़ 9वें प्रयास में रचा इतिहास

जितेंद्र ने गुजरात से अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी. बीटेक करने के बाद उनके पास कॉर्पोरेट में जाने का मौका था, लेकिन उन्होंने देश सेवा की राह चुनी. यूपीएससी का सफर उनके लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था. वे 8 बार इस परीक्षा में असफल हुए. कई लोग इस मोड़ पर आकर हिम्मत हार जाते हैं और कोई दूसरा रास्ता चुन लेते हैं, लेकिन जितेंद्र ने हार नहीं माना. उन्होंने अपनी कमियों को सुधारा और अपने 9वें व अंतिम प्रयास में परीक्षा पास कर लिया.

आईएएस बनने के लिए टाल दी थी अपनी शादी

जितेंद्र (Jitendra Prajapati AIR 287) का एक ही संकल्प था यूपीएससी की परीक्षा पास करना. इसी जिद के चलते उन्होंने दो साल पहले होने वाली अपनी शादी को भी टाल दिया था. परिवार वालों ने उनका रिश्ता तय कर दिया था, लेकिन उन्होंने शादी करने से मना कर दिया था. परिवार ने भी उनके इस फैसले का सम्मान किया.

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लेखक के बारे में

Published by: Smita Dey

स्मिता दे प्रभात खबर में डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के तौर पर काम कर रही हैं. बुक्स पढ़ना, डांसिंग और ट्रैवलिंग का शौक रखने वाली स्मिता युवाओं को बेहतर करियर गाइड करना और नौकरी के लिए प्रोत्साहित करना पसंद करती हैं.

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