CBSE टेंडर विवाद में रांची के सार्थक के 5 सवाल, OSM सिस्टम पर बोर्ड को घेरा

CBSE Board OSM Tender: रांची के रहने वाले 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत कह रहे हैं कि उन्होंने CBSE के टेंडर (Tender) दस्तावेजों की तुलना की. उन्हें लगा कि कुछ नियमों में ऐसे बदलाव किए गए, जिनसे एक खास कंपनी Coempt को फायदा मिल सकता था.

CBSE Board OSM Tender: CBSE के On Screen Marking (OSM) सिस्टम को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है. इस बार चर्चा के केंद्र में कोई बड़ा नेता या अधिकारी नहीं, बल्कि 12वीं का एक छात्र है. छात्र सार्थक सिद्धांत (Sarthak Sidhant) ने CBSE के टेंडर डॉक्यूमेंट्स की तुलना कर कई सवाल उठाए हैं. उनका दावा है कि टेंडर प्रक्रिया में कई ऐसे बदलाव किए गए जिनसे एक खास कंपनी को फायदा मिल सकता था.

सार्थक की ओर से लिखे गए ब्लॉग ने सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा बटोरी है. कई लोगों ने उनके दस्तावेज आधारित विश्लेषण को शेयर किया और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए.

CBSE Board OSM Tender पर सार्थक के 5 सवाल

  • सार्थक का कहना है कि पुराने और नए टेंडर में अंतर मिला है. CBSE ने यह टेंडर तीन बार क्यों जारी किया. साथ ही छात्र ने पुराने और नए टेंडर की तुलना की और कई बदलाव देखे.
  • सार्थक सिद्धांत ने अपनी वीडियो में कहा है कि खराब प्रदर्शन से जुड़े नियम हटाए गए है. पुराने टेंडर में ऐसी 3 शर्तें थीं जो खराब प्रदर्शन करने वाली कंपनियों को रोक सकती थीं. नए टेंडर में ये शर्तें हटा दी गईं.
  • पहले नियम था कि जो कंपनी कभी भी ब्लैकलिस्ट हुई हो, उसे परेशानी हो सकती थी.नए नियम में इसे बदलकर “वर्तमान में ब्लैकलिस्ट” कर दिया गया. छात्र सवाल उठा रहे हैं कि अगर कोई कंपनी पहले ब्लैकलिस्ट हो चुकी है, तो उसे मौका क्यों दिया जाए?
  • अपने ब्लॉग में सार्थक कहते हैं कि टेंडर के लिए कम से कम 50 करोड़ रुपये के कारोबार की जरूरत थी. छात्र का दावा है कि Coempt इस सीमा को बहुत मामूली अंतर (करीब 1.7%) से पार कर पाई.
  • भ्रष्टाचार से जुड़े नियम नरम किए गए.
  • छात्र का कहना है कि इन सभी बदलावों को देखने पर ऐसा लगता है कि बड़ी आईटी कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई. इसके बजाय Coempt को फायदा पहुंचाने वाली परिस्थितियां बनाई गईं.

CBSE से जवाब की उम्मीद

सार्थक ने कहा कि उन्होंने अपने ब्लॉग के जरिए कुछ महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं और उन्हें उम्मीद है कि CBSE इनका जवाब देगा. उनका मानना है कि सरकारी टेंडर और खरीद प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होनी चाहिए ताकि आम लोग भी दस्तावेज आसानी से देख और समझ सकें.

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लेखक के बारे में

Published by: Ravi Mallick

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