पैसों की तंगी फिर भी नहीं टूटी हिम्मत! पिता किसान अब बेटी बनेगी डॉक्टर

NEET Success Story: झुंझुनूं की मुदिता ने अपने दूसरे प्रयास में नीट यूजी परीक्षा में सफलता हासिल की है. उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 2249 हासिल किया है. वहीं, उनकी कैटेगरी रैंक 802 है. किसान पिता ने दिन-रात मेहनत की और बेटी को पढ़ाया. मुदिता बताती हैं कि उनके भाई ने उन्हें काफी सपोर्ट किया. आइए, जानते हैं उनकी कहानी.

NEET Success Story: मुश्किलें कितनी भी हो अगर आप लगातार मेहनत करते रहें तो सफलता जरूरत मिलती है. राजस्थान के झुंझुनूं की मुदिता लमोरिया (Mudita Lamoria) पर ये बात बिलकुल फिट बैठती है. उन्होंने 10वीं क्लास के बाद ही सपना देखा था कि डॉक्टर बनकर लोगों की मदद करेंगी. लेकिन इस सपने को पूरा करना इतना आसान नहीं था. महंगे कोचिंग की फीस ने मुदिता को कई बार उनके सपने से दूर किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. 

AIIMS से MBBS का सपना

NTA ने नीट री-एग्जाम का रिजल्ट जारी कर दिया है. झुंझुनूं की मुदिता लमोरिया (Mudita Lamoria) ने ऑल इंडिया रैंक 2249 हासिल किया है. वहीं, उनकी कैटेगरी रैंक 802 है. इस रैंक पर उन्हें AIIMS Jodhpur या सवाई मान सिंह (SMS) कॉलेज भी मिल सकता है. उन्होंने प्रभात खबर से बातचीत में कहा कि अगर मुझे एम्स जोधपुर नहीं मिला तो मैं दिल्ली स्थित Maulana Azad Medical College (MAMC) एडमिशन लेना चाहूंगी.


मुदिता की मार्कशीट

किसान पिता ने कड़ी मेहनत करके बेटी को पढ़ाया

मुदिता के पिता मान सिंह पेशे से किसान हैं और उनकी मां प्रमिला देवी हाउस वाइफ हैं. मुदिता कहती हैं कि मेरे पिता ज्यादा पढ़े लिखे नहीं हैं. लेकिन उन्होंने हमेशा मुझे पढ़ने के लिए प्रेरित किया. मुदिता तीन भाई बहनों में सबसे बड़ी हैं. उनके दो छोटे भाइयों के लिए मुदिता ने मिसाल पेश की है. 

कोचिंग की महंगी फीस और भीड़ देखकर कदम डगमगया

उनकी अभी तक की पढ़ाई झुंझुनूं से हुई है. लेकिन जब नीट की तैयारी के लिए सीकर जाने का सोचा तो सबसे बड़ी समस्या था कि 1 लाख 80 हजार रुपये की कोचिंग की फीस कहां से आएगी. टेस्ट क्रैक करने पर उन्हें स्कॉलरशिप मिली, जिससे उनकी फीस कम हुई. लेकिन पहली बार अपने होम टाउन से निकलने के कारण उन्हें कई तरह की परेशानी हुई. मुदिता की सारी पढ़ाई-लिखाई झुंझुनूंं से हुई है, ऐसे में उनके सामने इंग्लिश लैंग्वेज को लेकर बैरियर था. साथ ही कोचिंग की भीड़ देखकर शुरुआत में कई बार लगा कि पता नहीं अपने मंजिल तक पहुंच पाएंगी या नहीं.

दूसरे प्रयास में हासिल की सफलता

मुदिता ने सभी चीजों को दरकिनार कर अपना मन तैयारी में लगाया. जब उनके क्लास टेस्ट में नंबर्स आने लगे तो उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा. पहले प्रयास में वे असफल रहीं. लेकिन अपने दूसरे प्रयास में मुदिता ने NEET परीक्षा में सफलता हासिल कर ली.

भाई और घर वालों को दिया सफलता का क्रेडिट

मुदिता बताती हैं कि बुआ के बेटे ने उन्हें काफी सपोर्ट किया. कहा कि भईया खुद भी इंजीनियर हैं, ऐसे में उन्हें पता है कि साइंस बैकग्राउंड कितना टफ होता है. साथ ही वे समझते हैं कि नीट जैसे नेशनल लेवल एग्जाम में कंपटीशन बहुत टफ होता है. ऐसे में उन्होंने हमेशा सपोर्ट किया और मोटिवेट करते रहे. मुदिता ने अपनी सफलता का क्रेडिट अपने माता-पिता, शिक्षक और परिवार को दिया. 

यह भी पढ़ें- 710 अंक, AIR 4... बिहार के आयुष ने बताया NEET क्रैक करने का फॉर्मूला


प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Shambhavi Shivani

शाम्भवी शिक्षा, रोजगार, एडमिशन और सक्सेस स्टोरी पर खास नजर रखती हैं. उन्होंने प्रभात खबर के लिए कई UPSC और BPSC टॉपर्स के इंटरव्यू लिए हैं. साथ ही इस प्लेटफॉर्म के लिए AI एजुकेशन और करियर गाइडेंस पर एक्सपर्ट ओपनियन भी बनाती हैं. उनकी खासियत है कि वो डाटा रिलेटेड खबरों और फैक्ट्स को आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाती हैं. शाम्भवी को डिजिटल मीडिया में 3 सालों से अधिक का अनुभव है. प्रभात खबर से पहले वे राजस्थान पत्रिका और पटना स्थित न्यूज़ हाट में भी काम कर चुकी हैं. 

और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >