NEET Protest 2026: Baby Boomer नेता vs Gen-Z, जंतर मंतर पर मिसमैच, स्लैंग में समझें पूरा मामला

NEET Protest 2026: दिल्ली के जंतर मंतर पर इस वक्त जो हो रहा है, उसे अगर एक लाइन में समझना हो तो कुछ यूं कहेंगे एक तरफ फॉर्मल भाषण, दूसरी तरफ रील बनाते बच्चे. इसको Baby Boomer vs Gen-Z कहना गलत नहीं होगा.

NEET Protest 2026: मई 2026 में NEET-UG का पेपर हुआ, लेकिन लीक के इतने पक्के आरोप लगे कि पूरा एग्जाम कैंसिल करना पड़ा. ये कोई छोटी बात नहीं, लाखों बच्चों की मेहनत एक झटके में डाउन हो गई. दोबारा एग्जाम जून में हुआ, पर तब तक बच्चों का सिस्टम पर से भरोसा पूरी तरह उखड़ चुका था. CBI ने गिरफ्तारियां भी कीं, लेकिन असली सवाल यही रहा- हर साल यही ड्रामा क्यों रिपीट होता है?

Baby Boomer और Gen-Z क्या है?

Gen-Z यानी जेन जेड शब्द काफी चर्चा में है. यह उन लोगों को कहा जाता है जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है. वहीं, Baby Boomer उन लोगों को कहा जाता है जिनका जन्म 1946 से 1964 के बीच हुआ है. सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद जब आर्मी अपने घर को लौट गए तो दुनिया भर में बच्चों की Birth Rate काफी तेजी से बढ़ा यानी Boom किया. इसलिए इस बीच पैदा होने वालों को Baby Boomer कहते हैं.

आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार

इस पूरे गुस्से को एक शेप दी Gen-Z वाली Cockroach Janta Party ने. जून लास्ट से जंतर मंतर पर शुरू हुआ प्रोटेस्ट धीरे-धीरे बड़ा होता गया, मामला वायरल हो गया. फिर एंट्री हुई सोनम वांगचुक की, जो सीधा भूख हड़ताल पर बैठ गए. इससे मामला नेशनल लेवल पर छा गया. उनकी तबीयत बिगड़ी, अस्पताल शिफ्ट करना पड़ा, फिर भी बंदा अपने स्टैंड पर अड़ा रहा. देशभर से उनके लिए रिस्पेक्ट.


जब बात हाथापाई तक पहुंच गई

20 जुलाई को जब बच्चे संसद तक मार्च निकालने चले, तो पुलिस और प्रोटेस्टर्स के बीच सीधा टकराव हो गया. लाठीचार्ज के आरोप लगे, लाइट कट हुई, नेट बंद होने की शिकायतें भी आईं. विपक्ष के नेता भी मैदान में कूद पड़े और उन्हें भी उठा लिया गया. ये अब सिर्फ एग्जाम का मसला नहीं रहा, ये तो सीधा-सीधा अपनी बात रखने का हक वाला सवाल बन गया.

Baby Boomer vs Gen-Z

यहां सबसे इंटरेस्टिंग गैप यही है- सरकार अपनी पुरानी घिसी-पिटी डिप्लोमैटिक भाषा में जवाब देती है, टाइप "प्रक्रिया चल रही है, विचार किया जा रहा है." उधर बच्चे साफ बोलते हैं, "बस, अभी बताओ, हां या ना." ये सिर्फ भाषा का फर्क नहीं, ये दिखाता है कि आज की जनरेशन टालमटोल नहीं, सीधा एक्शन चाहती है. इसको स्लैंग में Baby Boomer vs Gen-Z कहते हैं.

बवाल की असली वजह क्या है

इस पूरे तमाशे का सेंटर पॉइंट सिर्फ किसी एक मंत्री का इस्तीफा नहीं है. बात है एग्जाम सिस्टम की साख की. लाखों बच्चे और उनके पेरेंट्स सालों की मेहनत के बाद बस एक फेयर चांस मांग रहे हैं. जब वही सिस्टम बार-बार गिरता है, तो ये सिर्फ नाराजगी नहीं रहती, ये पूरी जनरेशन की फ्रस्ट्रेशन का चेहरा बन जाती है.

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लेखक के बारे में

रवि मल्लिक पिछले 7 सालों से डिजिटल पत्रकारिता से जुड़े हैं. स्कूली शिक्षा से लेकर नौकरी तक की खबरों पर काम करना पसंद है. युवाओं को बेहतर करियर ऑप्शन, करंट अफेयर्स और नई वैकेंसी के बारे में बताना अच्छा लगता है. बोर्ड परीक्षा हो या UPSC, JEE और NEET एग्जाम टॉपर्स से बात करना और उनकी स्ट्रेटजी के बारे में जानना पसंद है. युवाओं को प्रेरित करने के लिए उनके बीच के मुद्दों को उठाना और सही व सटीक जानकारी देना ही उनकी प्राथमिकता है.

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