International Literacy Day 2026: आज की तेज दौड़ती दुनिया में पढ़ाई-लिखाई केवल नौकरी पाने का जरिया नहीं, बल्कि एक बेहतर और सम्मानजनक जिंदगी जीने की बुनियादी जरूरत बन चुकी है. इसी जरूरत को पूरी दुनिया में बताने के लिए हर साल 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस (International Literacy Day) मनाया जाता है.
यह दिन समाज के हर वर्ग तक शिक्षा पहुंचाने, निरक्षरता को खत्म करने और लोगों को उनके बुनियादी अधिकारों के प्रति जागरूक करने का एक अहम मौका है.
विश्व साक्षरता दिवस की शुरुआत कब और कैसे हुई?
इस दिन को मनाने की नींव 1965 में ईरान की राजधानी तेहरान में रखी गई थी. वहां दुनिया भर के देशों के शिक्षा मंत्रियों का एक बड़ा वैश्विक सम्मेलन हुआ था, जिसमें निरक्षरता को खत्म करने पर चर्चा हुई.
इसके बाद संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को (UNESCO) ने 26 अक्टूबर 1966 को आधिकारिक तौर पर फैसला लिया कि हर साल 8 सितंबर को 'विश्व साक्षरता दिवस' के रूप में मनाया जाएगा. पहली बार 8 सितंबर 1967 को यह दिवस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया गया और तब से यह सिलसिला लगातार जारी है.
ये भी पढ़ें: शिक्षक दिवस से जुड़े इस महान दार्शनिक के बारे में जानें 10 अनसुनी बातें, हर छात्र को लेनी चाहिए प्रेरणा
इस दिन को मनाने का मुख्य मकसद क्या है?
विश्व साक्षरता दिवस मनाने के पीछे कुछ बेहद जरूरी लक्ष्य हैं:
- मानव अधिकार के रूप में शिक्षा: हर इंसान को अक्षर ज्ञान और बुनियादी शिक्षा का अधिकार दिलाना.
- गरीबी और बेरोजगारी पर चोट: अनपढ़ता सीधे तौर पर गरीबी को बढ़ावा देती है. जब लोग साक्षर होते हैं, तो उन्हें रोजगार और बेहतर कमाई के नए रास्ते मिलते हैं.
- महिलाओं की साक्षरता पर जोर: समाज में आज भी पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की साक्षरता दर में अंतर दिखता है. यह दिन बालिकाओं और महिलाओं को स्कूल भेजने की मुहिम को तेज करता है.
- डिजिटल साक्षरता की जरूरत: आज के समय में सिर्फ कॉपी-किताब पढ़ना काफी नहीं है. मोबाइल, इंटरनेट और ऑनलाइन सेवाओं का सही इस्तेमाल सिखाना यानी डिजिटल साक्षरता भी इसका अहम हिस्सा बन चुकी है.
भारत के लिए साक्षरता दिवस क्यों है खास?
आजादी के समय भारत की साक्षरता दर बेहद कम थी. बीते दशकों में 'सर्व शिक्षा अभियान', 'मिड-डे मील', और अब 'न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम' (उल्लास योजना) जैसी सरकारी पहलों से देश में साक्षरता का ग्राफ काफी सुधरा है.
हालांकि, दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों और वंचित लोगों में आज भी शत-प्रतिशत साक्षरता हासिल करना एक बड़ा लक्ष्य है. 8 सितंबर का यह दिन हमें याद दिलाता है कि जब तक समाज का आखिरी व्यक्ति पढ़ना-लिखना नहीं सीख लेता, तब तक असली विकास की दौड़ अधूरी है.
ये भी पढ़ें: कोडिंग और प्रोग्रामिंग के एक्सपर्ट के लिए बेस्ट हैं ये सरकारी नौकरी
