बिहार का वो गणितज्ञ, जिसके लिए बदले गए यूनिवर्सिटी के नियम और जिसने आइंस्टीन के सिद्धांत को चुनौती दी

Vashishtha Narayan Birth Anniversary: पद्मश्री वशिष्ठ नारायण सिंह (2 अप्रैल 1946 – 14 नवंबर 2019) बिहार के महान गणितज्ञ थे, जिन्होंने आइंस्टीन के सिद्धांत को चुनौती दी. बर्कले यूनिवर्सिटी से पीएचडी, नासा में कार्य, फिर भारत वापसी. मानसिक बीमारी के कारण गुमनामी में रहे, अंततः 2019 में निधन हुआ

Vashishtha Narayan Birth Anniversary: बिहार के भोजपुर जिले के वसंतपुर गांव में 2 अप्रैल 1946 को जन्मे वशिष्ठ नारायण सिंह को गणित की दुनिया का अनमोल रत्न माना जाता है. उनकी प्रतिभा इतनी विलक्षण थी कि उनके लिए पटना विश्वविद्यालय को अपने नियम तक बदलने पड़े. उनकी जन्मतिथि को देखते हुए, यह दिन भारतीय गणित के लिए एक विशेष अवसर है, जब हम उनकी अद्वितीय उपलब्धियों को याद कर सकते हैं.

शिक्षा और अपार प्रतिभा

वशिष्ठ नारायण सिंह ने नेतरहाट विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की और संयुक्त बिहार में टॉप किया. इसके बाद वे पटना साइंस कॉलेज में पढ़ने लगे. उनकी अद्वितीय प्रतिभा को कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन कैली ने पहचाना और उन्हें 1965 में अमेरिका ले गए. 1969 में उन्होंने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी पूरी की और वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर बने. वशिष्ठ नारायण सिंह ने नासा में भी काम किया. एक मशहूर घटना के अनुसार, जब अपोलो मिशन के दौरान कुछ समय के लिए नासा के 31 कंप्यूटर बंद हो गए थे, तो उन्होंने अपनी गणना कागज पर जारी रखी. जब कंप्यूटर फिर से चालू हुए तो उनकी गणना कंप्यूटर की गणना से मेल खा रही थी.

भारत वापसी और संघर्ष

Vashishtha narayan

1971 में वे भारत लौट आए और आईआईटी कानपुर, आईआईटी मुंबई और आईएसआई कोलकाता में कार्य किया. हालांकि, वे स्कित्जोफ्रेनिया नामक मानसिक बीमारी से ग्रसित हो गए, जिसने उनके जीवन को मुश्किल बना दिया. 1973 में उनकी शादी वंदना रानी सिंह से हुई, लेकिन उनके असामान्य व्यवहार के कारण यह विवाह लंबे समय तक नहीं चला. 1989 में वे अचानक लापता हो गए और 5 वर्षों तक उनकी कोई खबर नहीं थी. अंततः 1993 में वे छपरा में पाए गए और फिर उनका इलाज बेंगलुरु में किया गया. उनकी स्थिति में सुधार तो हुआ, लेकिन उन्हें फिर भी गुमनामी का जीवन ही जीना पड़ा. उनके इलाज और पुनर्वास के लिए प्रभात खबर ने एक विशेष अभियान चलाया था, जिससे उन्हें आवश्यक चिकित्सा सहायता मिल सकी. इस पहल के चलते सरकार और समाज का ध्यान उनकी स्थिति पर गया.

निधन और स्मरण

14 नवंबर 2019 को पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में वशिष्ठ नारायण सिंह का निधन हो गया. उनके निधन से भारत ने एक अनमोल गणितज्ञ खो दिया. उनकी जयंती को गणित और विज्ञान के छात्रों के लिए प्रेरणा दिवस के रूप में मनाना चाहिए ताकि उनकी प्रतिभा और संघर्ष की कहानी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सके.

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लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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