FSSAI से लेकर RBI तक, क्या आप जानते हैं इन संस्था को क्या कहा जाता है?

Statutory Body Vs Regulatory Body: Statutory Body यानी वैधानिक निकाय वह संस्था होती है, जिसे संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा बनाया जाता है. Regulatory Body को रेगुलेट या कंट्रोल करने के लिए बनाया जाता है.

Statutory Body Vs Regulatory Body: आज के समय में प्रतियोगी परीक्षाओं से लेकर सरकारी नौकरियों के इंटरव्यू तक में Statutory Body (वैधानिक निकाय) और Regulatory Body (नियामक निकाय) से जुड़े सवाल अक्सर पूछे जाते हैं. RBI, SEBI, TRAI, IRDAI और NHRC जैसे संस्थानों के नाम तो ज्यादातर लोग जानते हैं, लेकिन इनके बीच का अंतर बहुत कम लोगों को पता होता है.

क्या होती है Statutory Body?

Statutory Body यानी वैधानिक निकाय वह संस्था होती है, जिसे संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी विशेष कानून (Act) के तहत बनाया जाता है. इन संस्थाओं को सीधे कानून से अधिकार प्राप्त होते हैं और वे कानून द्वारा निर्धारित कार्यों को पूरा करती हैं. इनका काम सरकार को सलाह देना, पॉलिसी को लागू करना या किसी विशेष प्रशासनिक जिम्मेदारी का निर्वहन करना हो सकता है.

वैधानिक निकायों के उदाहरण

  • SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड)
  • NHRC (राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग)
  • NGT (राष्ट्रीय हरित अधिकरण)
  • FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया)

क्या होती है Regulatory Body?

Regulatory Body यानी नियामक निकाय किसी विशेष क्षेत्र या उद्योग की निगरानी और कंट्रोल के लिए बनाई जाती है. इनका मुख्य उद्देश्य नियम बनाना, बाजार में पारदर्शिता बनाए रखना और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना होता है. ये संस्थाएं फाइनेंस, दूरसंचार, बीमा, शिक्षा और बैंकिंग जैसे क्षेत्रों में काम करती हैं.

नियामक निकायों के उदाहरण

  • RBI (भारतीय रिजर्व बैंक)
  • TRAI (भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण)
  • IRDAI (भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण)
  • SEBI

कई Regulatory Bodies किसी कानून के तहत बनाई जाती हैं, इसलिए वे Statutory Body भी होती हैं. हालांकि सभी Statutory Bodies का काम नियमन करना नहीं होता. उदाहरण के लिए NHRC एक वैधानिक निकाय है, लेकिन उसका मुख्य काम मानवाधिकारों की रक्षा करना है, न कि किसी उद्योग को नियंत्रित करना.

एक नजर में समझें अंतर

विशेषताStatutory Body (वैधानिक निकाय)Regulatory Body (नियामक निकाय)
गठनसंसद या विधानसभा द्वारा पारित अधिनियम (Act) सेअधिनियम (Act) या कार्यकारी आदेश (Executive Order) से
मुख्य उद्देश्यकानून के तहत सौंपे गए कार्यों को पूरा करनाकिसी क्षेत्र के नियम बनाना और उसकी निगरानी करना
प्रकृतिहमेशा वैधानिक (Statutory)वैधानिक, संवैधानिक या गैर-वैधानिक हो सकती है
भूमिकाप्रशासनिक, सलाहकारी या निगरानी संबंधी कार्यनियमन (Regulation) और नियंत्रण (Control)
उदाहरणNHRC, NGT, FSSAIRBI, TRAI, IRDAI, SEBI

प्रतियोगी परीक्षाओं में क्यों है महत्वपूर्ण?

UPSC, SSC, Banking, Railway, State PCS और अन्य सरकारी परीक्षाओं में Statutory Body, Regulatory Body और Constitutional Body से जुड़े प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं. इसलिए उम्मीदवारों के लिए इन संस्थाओं की भूमिका और अंतर समझना बेहद जरूरी है.

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याद रखने का आसान ट्रिक

Statutory Body = Act से बनी संस्था
Regulatory Body = नियम बनाने और लागू कराने वाली संस्था

यानी यदि कोई संस्था किसी क्षेत्र को नियंत्रित करती है तो वह Regulatory Body कहलाती है, जबकि किसी कानून के तहत स्थापित संस्था Statutory Body होती है.

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By Shambhavi shivani

शाम्भवी शिक्षा, रोजगार, एडमिशन और सक्सेस स्टोरी पर खास नजर रखती हैं. उन्होंने प्रभात खबर के लिए कई UPSC और BPSC टॉपर्स के इंटरव्यू लिए हैं. साथ ही इस प्लेटफॉर्म के लिए AI एजुकेशन और करियर गाइडेंस पर एक्सपर्ट ओपनियन भी बनाती हैं. उनकी खासियत है कि वो डाटा रिलेटेड खबरों और फैक्ट्स को आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाती हैं. शाम्भवी को डिजिटल मीडिया में 3 सालों से अधिक का अनुभव है. प्रभात खबर से पहले वे राजस्थान पत्रिका और पटना स्थित न्यूज़ हाट में भी काम कर चुकी हैं. 

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