Safest Place in the World: आज हर इंसान ऐसी जगह रहना चाहता है जहां डर न हो, क्राइम कम हों और लोग शांति से अपना जीवन जी सकें. जब हम कहते हैं दुनिया का सबसे सुरक्षित देश, तो इसका मतलब होता है ऐसा देश जहां कानून मजबूत हो, पुलिस व्यवस्था अच्छी हो और लोग एक-दूसरे की रिस्पेक्ट करते हों. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि दुनिया का सबसे सुरक्षित देश (Safest Place in the World) कौन सा है.
दुनिया का सबसे सुरक्षित देश कौन सा है?
World of Statistics की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया का सबसे सुरक्षित देश आइसलैंड (Safest Place in the World) है. इसके अलावा ऐसे कई देश है, जिन्हें वर्ल्ड ऑफ स्टैटिस्टिक्स 2025 के कैटेगरी में रखा गया है, जैसे-
- आयरलैंड
- न्यूजीलैंड
- ऑस्ट्रिया
- स्विट्ज़रलैंड
- सिंगापुर
- पुर्तगाल
- डेनमार्क
- स्लोवेनिया
- फिनलैंड
- चेक गणराज्य
- जापान
- मलेशिया
- कनाडा
- नीदरलैंड्स
- बेल्जियम
- हंगरी
- ऑस्ट्रेलिया
- क्रोएशिया
- जर्मनी
- भूटान
- लिथुआनिया
- लातविया
- एस्टोनिया
- स्पेन
- मॉरीशस
- कतर
- स्लोवाकिया
- बुल्गारिया
- यूनाइटेड किंगडम
- कुवैत
- नॉर्वे
- इटली
- मोंटेनेग्रो
- स्वीडन
- पोलैंड
- मंगोलिया
- रोमानिया
- वियतनाम
- ताइवान
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World of Statistics की रिपोर्ट
Safest Place in the World: आइसलैंड की सुरक्षा की खासियत
आइसलैंड एक ऐसा देश है जिसके पास अपनी सेना ही नहीं है. यानी वहां टैंक, फौज और हथियारों वाली बड़ी आर्मी नहीं है. इसलिए वह अकेले लड़ने के बजाय अपने दोस्त देशों पर भरोसा करता है. उसका सबसे बड़ा सपोर्ट है NATO और अमेरिका के साथ हुआ 1951 का समझौता. मतलब जरूरत पड़ने पर ये देश आइसलैंड की मदद करते हैं. साथ ही आइसलैंड UN, NATO और OSCE जैसे बड़े संगठनों का भी मेंबर है, ताकि दुनिया के साथ मिलकर फैसले ले सके.
आज के समय में सुरक्षा का मतलब सिर्फ बॉर्डर पर पहरा देना नहीं है. अब खतरे मोबाइल और कंप्यूटर तक पहुंच गए हैं. कहीं साइबर अटैक हो जाता है, कहीं आतंकवाद, कहीं बीमारी, कहीं पर्यावरण खराब हो रहा है, तो कहीं गरीबी बढ़ रही है. ऐसे में कोई भी देश अकेले हीरो बनकर सब नहीं संभाल सकता. इसलिए आइसलैंड कहता है कि मिलकर काम करेंगे, तभी सुरक्षित रहेंगे.
आइसलैंड की सरकार मानव अधिकारों को बहुत सीरियसली लेती है. मतलब हर इंसान को बराबरी मिले, किसी के साथ गलत न हो. खासकर महिलाओं को आगे बढ़ाने पर वह ज्यादा ध्यान देता है. वहां की सोच है कि जब महिलाएं मजबूत होंगी, तभी समाज भी मजबूत बनेगा. इसलिए वह चाहता है कि महिलाएं बड़े फैसलों में शामिल हों, शांति की बात हो या देश को दोबारा खड़ा करने का काम.
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