भारत के किस राज्य को कहते हैं Cheetah State, जानें वजह

Cheetah State of India: क्या आप जानते हैं कि भारत के किस राज्य को चीता स्टेट ऑफ इंडिया कहा जाता है. अगर नहीं जानते हैं तो यहां देखें और अपने जनरल नॉलेज को मजबूत करें.

Cheetah State of India: भारत में अलग-अलग राज्यों की अपनी खास पहचान होती है. किसी राज्य को मसालों के लिए जाना जाता है तो किसी को चाय, जंगल या संस्कृति के लिए. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा राज्य भी है जिसे “चीता स्टेट” कहा जाने लगा है. यह नाम हाल के सालों में काफी चर्चा में आया है. अगर आप भी सोच रहे हैं कि कौन सा राज्य इस नाम (Cheetah State of India) से जाना जाता है और इसकी वजह क्या है, तो आइए जानते हैं. 

किस राज्य को कहा जाता है Cheetah State of India?

भारत का मध्य प्रदेश राज्य अब चीता स्टेट के नाम से पहचाना जाने लगा है. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि देश में चीता पुनर्वास (Cheetah Reintroduction) की शुरुआत यहीं से हुई. लंबे समय तक भारत से चीते गायब हो चुके थे, लेकिन उन्हें फिर से बसाने की योजना के तहत सबसे पहले मध्य प्रदेश को चुना गया. 

साल 2022 में अफ्रीकी देश नामीबिया से कुछ चीतों को भारत लाया गया और उन्हें मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में छोड़ा गया. इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी कुछ चीते यहां लाए गए. इसी कारण मध्य प्रदेश को Cheetah State कहा जाने लगा. 

भारत से क्यों गायब हो गए थे चीते?

बहुत कम लोग जानते हैं कि कभी भारत में बड़ी संख्या में चीते पाए जाते थे. लेकिन शिकार, जंगलों की कमी और बदलते पर्यावरण के कारण उनकी संख्या लगातार घटती गई. साल 1952 में भारत सरकार ने चीते को देश में विलुप्त घोषित कर दिया. करीब 70 साल बाद फिर से चीतों को भारत में बसाने की योजना बनी ताकि जंगलों का संतुलन बेहतर हो और विलुप्त हो चुकी इस प्रजाति को फिर से देखा जा सके. 

कुनो नेशनल पार्क क्यों चुना गया?

मध्य प्रदेश (Cheetah State of India) का कुनो नेशनल पार्क चीतों के लिए सबसे उपयुक्त माना गया. यहां बड़ा जंगल क्षेत्र, पर्याप्त शिकार और प्राकृतिक वातावरण मौजूद है. चीते यहां आसानी से खुद को नए माहौल में ढाल सकते हैं. 

इसी वजह से सरकार और वन विभाग ने कुनो को चीता प्रोजेक्ट का मुख्य केंद्र बनाया।. आज यह जगह देश-विदेश में चर्चा का विषय बन चुकी है. 

Cheetah Project से क्या फायदे होंगे?

चीतों की वापसी केवल जानवरों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है. इसके कई फायदे बताए जा रहे हैं, जैसे 

  • पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
  • पर्यावरण संतुलन बेहतर होगा. 
  • वन्यजीव संरक्षण को मिलेगा समर्थन

चीतों के घूमने के लिए देश का पहला ‘इंटर-स्टेट कॉरिडोर’

चीते बहुत तेजी से भागते हैं और उन्हें रहने के लिए खुली और ज्यादा जगह चाहिए होती है ताकि आपस में लड़ाई न हो. इसी बात को ध्यान में रखकर सरकार ने देश का पहला ‘इंटर-स्टेट चीता कंजर्वेशन कॉरिडोर’ बनाने की मंजूरी दी है. यह कॉरिडोर मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क को राजस्थान के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व से जोड़ेगा. इससे चीते बिना किसी रोक-टोक के एक राज्य से दूसरे राज्य के जंगलों में घूम सकेंगे. 

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लेखक के बारे में

Published by: Smita Dey

स्मिता दे प्रभात खबर में डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के तौर पर काम कर रही हैं. बुक्स पढ़ना, डांसिंग और ट्रैवलिंग का शौक रखने वाली स्मिता युवाओं को बेहतर करियर गाइड करना और नौकरी के लिए प्रोत्साहित करना पसंद करती हैं.

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