Education : Allahabad University : इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के स्नातक द्वितीय वर्ष के छात्रों ने परोपकार पर मनोवैज्ञानिक प्रयोग करते हुए यह प्रमाणित किया है कि व्यक्ति मदद तब करता है जब वह देखता है कि उसके आसपास के लोग भी परोपकार में संलग्न हैं. इसके अतिरिक्त, व्यक्ति की पुरानी पीड़ा भी उसे दूसरों की मदद करने के लिए प्रेरित करती है. यह परिणाम कैंसर पीड़ितों की मदद से संबंधित सामाजिक प्रयोग के जरिये सामने आया है. इस प्रयोग में प्रतिभागियों के दो समूह बनाये गये. एक समूह के प्रतिभागियों से यह पूछा गया कि क्या आप कैंसर पीड़ितों की मदद करना चाहेंगे, अगर हां, तो आप स्वेच्छा से एक धनराशि दे सकते हैं. वहीं दूसरे समूह के प्रतिभागियों को इस जानकारी के अलावा अतिरिक्त सूचना भी दी गयी, कि आपके जैसे अन्य व्यक्तियों ने भी हमें धनराशि दी है. दोनों ही समूहों के प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि आपके द्वारा दी गयी धनराशि का प्रयोग कमला नेहरू अस्पताल में आने वाले मरीजों के उपयोग के लिए किया जायेगा. इस प्रयोग का परिणाम सामने आने पर यह पता लगा कि दूसरे समूह के प्रतिभागियों ने प्रथम समूह की तुलना में अधिक धनराशि देकर सहयोग किया है.
विदित हो कि उपरोक्त दोनों समूहों द्वारा दी गयी धनराशि से विज्ञान दिवस (28 फरवरी) के एक दिन पूर्व, यानी आज मरीजों के उपयोग से जुड़े सामान कमला नेहरू अस्पताल को दिये गये. इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर संदीप आनंद के मार्गदर्शन में यह प्रयोग किया गया. विद्यार्थियों के बीच परोपकार की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय में इस तरह के प्रयोग अभी और किये जाने हैं. इस संबंध में प्रोफेसर संदीप आनंद का कहना है कि इस तरह के मनोवैज्ञानिक प्रयोग से छात्रों के अंदर परोपकार करने की भावना विकसित होगी, जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होगा. पूर्व अध्ययन यह प्रमाणित करते हैं कि परोपकार की भावना हमें खुशी भी देती है और यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है. विदित हो कि वर्तमान प्रयोग के परिणाम परोपकार की संस्कृति के विकास से संबंधित नये प्रयोगों को डिजाइन करने में भी सहायक होंगे.
