CJP Leader Vijeta Dahiya Education: बहुत कम लोग जानते हैं कि विजेता दहिया सिर्फ राजनीतिक टिप्पणीकार नहीं, बल्कि इंजीनियर, लेखक, फिल्ममेकर और थिएटर आर्टिस्ट भी रह चुके हैं. आइए जानते हैं कि विजेता दहिया कितने पढ़े लिखे हैं.
हरियाणा के गांव से शुरू हुई कहानी
विजेता दहिया का जन्म हरियाणा के सोनीपत जिले के नाहरी गांव में एक किसान परिवार में हुआ. बचपन गांव में बीता, लेकिन उनके सपने काफी बड़े थे. परिवार का माहौल पढ़ाई-लिखाई वाला था. उनके पिता शिक्षक रहे, जबकि मां सुशीला देवी ने परिवार को संभाला. बचपन से ही उन्हें थिएटर और मंच की दुनिया में काफी दिलचस्पी थी.
स्कूल से इंजीनियरिंग तक का सफर
विजेता दहिया ने शुरुआती पढ़ाई होली चाइल्ड स्कूल, सोनीपत से की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली पब्लिक स्कूल, आरके पुरम में पढ़ाई की. पढ़ाई में अच्छे रहे और आगे चलकर दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, जिसे आज दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी यानी DTU के नाम से जाना जाता है, में दाखिला लिया.
उन्होंने साल 2009 में प्रोडक्शन एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की. यानी जो शख्स आज राजनीतिक बहसों में नजर आता है, उसकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि पूरी तरह इंजीनियरिंग की है.
इंजीनियर बने, फिर सरकारी नौकरी भी की
कॉलेज खत्म होने के बाद विजेता दहिया ने रणबक्सी लैबोरेट्रीज में बिजनेस इंटेलिजेंस एग्जीक्यूटिव के तौर पर नौकरी शुरू की. इसके बाद उन्हें विदेश मंत्रालय में सरकारी नौकरी भी मिली. आमतौर पर लोग ऐसी नौकरी मिलने के बाद पूरी जिंदगी वहीं बिताना चाहते हैं, लेकिन विजेता दहिया का मन कुछ और करना चाहता था.
StarsUnfolded के अनुसार, सरकारी नौकरी के साथ-साथ विजेता दहिया ने थिएटर, लेखन और फिल्म निर्माण का काम जारी रखा. आखिरकार उन्होंने नौकरी छोड़ दी और अपने सपनों के पीछे मुंबई का रुख कर लिया.
थिएटर, फिल्म और किताबों से गहरा रिश्ता
विजेता दहिया बचपन से थिएटर करते रहे हैं. उन्होंने कई नाटक लिखे, निर्देशित किए और स्ट्रीट प्ले भी किए. महिला शिक्षा, लैंगिक भेदभाव और सामाजिक मुद्दों पर उन्होंने कॉलेजों में नुक्कड़ नाटक किए.
उन्होंने हरियाणवी फिल्में 'दरारें' और 'ओपरी पराई' का निर्देशन भी किया. इसके अलावा 'Power of Universe' और 'To Hell With That Job' नाम की दो किताबें भी लिखीं. साहित्यिक दुनिया में वह 'गुलफाम' नाम से कविताएं भी लिखते हैं.
ध्रुव राठी से जुड़ने के बाद बदली पहचान
डिजिटल दुनिया में उनकी पहचान तब बढ़ी जब वह यूट्यूबर ध्रुव राठी के लिए रिसर्चर और स्क्रिप्ट राइटर के तौर पर काम करने लगे. इसके बाद उनके राजनीतिक कंटेंट को बड़ी पहचान मिली और सोशल मीडिया पर उनका नाम तेजी से चर्चा में आने लगा.
कैसे बने कॉक्रोच जनता पार्टी के प्रवक्ता?
जून 2026 में विजेता दहिया को कॉक्रोच जनता पार्टी का आधिकारिक प्रवक्ता बनाया गया. यह वही व्यंग्यात्मक आंदोलन है जो बेरोजगारी और युवाओं के मुद्दों को लेकर शुरू हुआ था. पार्टी के मंच से उन्होंने NEET पेपर लीक जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही की मांग भी की.
आज विजेता दहिया की पहचान सिर्फ एक राजनीतिक प्रवक्ता की नहीं है. वह इंजीनियर, लेखक, फिल्ममेकर, थिएटर आर्टिस्ट और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बोलने वाले एक्टिविस्ट के तौर पर भी जाने जाते हैं. उनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि जिंदगी में एक ही रास्ता चुनना जरूरी नहीं होता.
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