CBSE ने मानी भूल, फॉरेन लैंग्वेज की डिमांड को लेकर जानिए क्या है शिक्षकों का कहना

CBSE Three Language Policy: पहले से दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे विद्यार्थियों को छूट देकर CBSE बोर्ड ने यह मैसेज दिया है कि नई पॉलिसी लागू करते समय छात्रों की कंडीशन और प्रैक्टिकल ग्राउंड देखना जरूरी है. पटना के पीजीटी शिक्षक अमित कुमार श्रीवास्तव ने प्रभात खबर से बातचीत में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर ये बात कही.

CBSE Three Language Policy: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 29 जून 2026 को थ्री लैंग्वेज पॉलिसी (Three Language Policy) को लेकर एक नोटिस जारी करते हुए कहा कि क्लास 10वीं के मौजूदा स्टूडेंट पर थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू नहीं होगी. क्लास 9वीं के मौजूदा छात्रों को छूट दी गई है. वे दो विदेशी भाषा और एक इंडियन लैंग्वेज पढ़ सकते हैं. इस बीच लगातार न्यूज और खबरों में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी छाई हुई है. स्कूल में पढ़ाई जाने वाली भाषा को लेकर शिक्षकों की राय अलग-अलग है.

थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर क्या है शिक्षकों का कहना?

कुछ का कहना है कि स्थानीय लैंग्वेज से छात्रों को इंडियन कल्चर को जानने में मदद मिलेगी. वहीं कुछ का कहना है कि एक साथ इतनी भाषाओं को पढ़ाने के फैसले पर इसलिए भी विचार करना चाहिए क्योंकि इससे स्टूडेंट्स पर प्रेशर बढ़ेगा. रांची के डोरंडा स्थित St. Xavier’s school के प्रिंसिपल फूलदेव सोरेंग का कहना है कि CBSE द्वारा थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने का उद्देश्य विद्यार्थियों को भाषाई और सांस्कृतिक रूप से अधिक समृद्ध बनाना है.

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इंडियन लैंग्वेज से पर्सनालिटी होगी बूस्ट

शिक्षा के क्षेत्र में कई सालों से काम करने वाले फूलदेव सोरेंग ने प्रभात खबर से बातचीत में कहा कि भारत जैसे विविधता वाले देश में कम-से-कम दो भारतीय भाषाओं का नॉलेज छात्रों की पर्सनालिटी के ग्रोथ के लिए जरूरी है. मातृभाषा और भारतीय भाषाएं केवल कम्युनिकेशन का ही जरिया नहीं बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों की पहचान भी हैं.

फूलदेव सोरें रांची के एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल

हालांकि, St. Xavier’s स्कूल के प्रिंसिपल ने आगे कहा कि आज का समय टफ कंपटीशन का है. ऐसे में फॉरेन लैंग्वेज के नॉलेज से उन्हें फ्यूचर में कई फायदे हो सकते हैं. फ्रेंच, जर्मन, जापानी या स्पेनिश जैसी भाषाएं विद्यार्थियों को भविष्य में नए आयाम प्रदान कर सकती हैं. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं होना चाहिए कि भारतीय भाषाओं को पूरी तरह हटाकर उनकी जगह केवल विदेशी भाषा ही सिखाई जाए.

CBSE को प्रैक्टिकल होकर नियम बनाने की जरूरत

पटना स्थित DY Patil स्कूल के इंग्लिश (पीजीटी) शिक्षक अमित कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि CBSE ने पहले से दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे विद्यार्थियों को राहत देकर ये दिखाया है कि किसी भी पॉलिसी को प्रैक्टिकल दृष्टिकोण के साथ लागू किया जाना चाहिए.

लोकल लैंग्वेज हमारी असली पहचान है: इंग्लिश शिक्षक

एक शिक्षक के रूप में वे मानते हैं कि छात्रों को कम-से-कम दो भारतीय भाषाओं का ज्ञान होना चाहिए. लोकल लैंग्वेज हमारी असली पहचान है. उन्होंने कहा कि कुछ पेरेंट्स ऐसा तर्क देते हैं कि आज के समय में फॉरेन लैंग्वेज की अधिक डिमांड है. मैं मानता हूं कि फॉरेन लैंग्वेज की काफी डिमांड है, इससे रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं. लेकिन क्या विदेशी भाषा के कारण भारतीय भाषा की उपेक्षा (अनदेखा) नहीं किया जा सकता है.

PGT शिक्षक अमित कुमार श्रीवास्तव

शिक्षक ने कहा विदेशी भाषा भारतीय भाषा का रिपेल्समेंट नहीं हो सकती

अपनी भाषा से दूर रहकर छात्रों की पर्सनालिटी कमजोर रह जाती है. विदेशी भाषा सीखना निश्चित रूप से लाभकारी है. लेकिन यह भारतीय भाषाओं का विकल्प नहीं, बल्कि उनका पूरक होना चाहिए. न्यू एजुकेशन पॉलिसी के तहत CBSE इस बैलेंस को बनाने की कोशिश कर रही है.

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By Shambhavi shivani

शाम्भवी शिक्षा, रोजगार, एडमिशन और सक्सेस स्टोरी पर खास नजर रखती हैं. उन्होंने प्रभात खबर के लिए कई UPSC और BPSC टॉपर्स के इंटरव्यू लिए हैं. साथ ही इस प्लेटफॉर्म के लिए AI एजुकेशन और करियर गाइडेंस पर एक्सपर्ट ओपनियन भी बनाती हैं. उनकी खासियत है कि वो डाटा रिलेटेड खबरों और फैक्ट्स को आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाती हैं. शाम्भवी को डिजिटल मीडिया में 3 सालों से अधिक का अनुभव है. प्रभात खबर से पहले वे राजस्थान पत्रिका और पटना स्थित न्यूज़ हाट में भी काम कर चुकी हैं. 

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