BTech Industrial Engineering: जब भी इंजीनियरिंग की बात आती है, तो आज के समय में हर किसी को बस कंप्यूटर साइंस ब्रांच के बारे में ही पता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इंजीनियरिंग की दुनिया में एक ऐसी भी ब्रांच है, जो आज के समय में कंप्यूटर साइंस से कम नहीं है. इस ब्रांच का नाम है इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग. Apple कंपनी के मालिक टिम कुक (Apple CEO Tim Cook) भी खुद एक इंडस्ट्रियल इंजीनियर ही हैं. अगर आप भी BTech करने की सोच रहे हैं और कंप्यूटर साइंस से हटकर कुछ अलग और शानदार करियर बनाना चाहते हैं, तो यह ब्रांच आपके लिए अच्छा साबित हो सकता है. आइए आसान जानते हैं इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग के बारे में.
क्या है इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग?
इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग (BTech Industrial Engineering) का मतलब है “काम को आसान, सस्ता और बेहतर बनाना“. किसी भी कंपनी, फैक्ट्री या बिजनेस में पैसा, समय, मशीनरी और इंसानों (वर्कफोर्स) का यूज इस तरह से करना कि कम से कम खर्च में सबसे बेस्ट रिजल्ट मिले, यही एक इंडस्ट्रियल इंजीनियर का काम होता है.
जहां एक मैकेनिकल इंजीनियर मशीन बनाता है और एक कंप्यूटर इंजीनियर सॉफ्टवेयर लिखता है, वहीं एक इंडस्ट्रियल इंजीनियर यह देखता है कि वे मशीनें और सॉफ्टवेयर मिलकर कैसे किसी कंपनी को ज्यादा से ज्यादा मुनाफा पहुंचा सकते हैं.
BTech CS से यह कैसे अलग और बेहतर है?
आज कंप्यूटर साइंस में कॉम्पिटिशन बहुत ज्यादा बढ़ चुका है. हर साल लाखों छात्र सीएस की डिग्री लेकर निकलते हैं, जिससे नौकरियां पाना मुश्किल होता जा रहा है. दूसरी तरफ, इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग का दायरा सिर्फ कोडिंग या कंप्यूटर स्क्रीन तक सीमित नहीं है.
इंडस्ट्रियल इंजीनियर्स को बिजनेस, मैनेजमेंट, डेटा एनालिसिस और कोर इंजीनियरिंग इन सभी चीजों की मिली-जुली जानकारी दी जाती है. आपके पास नौकरी पाने के लिए सिर्फ एक सेक्टर नहीं, बल्कि अलग-अलग सेक्टर्स के दरवाजे खुले होते हैं.
BTech Industrial Engineering: इन सेक्टर्स में होती है सबसे ज्यादा डिमांड
इंडस्ट्रियल इंजीनियर्स की जरूरत लगभग हर उस जगह पर होती है, जहां बड़े पैमाने पर काम होता है.
- ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स: Amazon या Flipkart जैसी कंपनियां आपके ऑर्डर को तेजी से और कम से कम खर्च में आपके घर पहुंचाती हैं. इसके पीछे पूरा दिमाग इंडस्ट्रियल इंजीनियर्स का होता है, जो सप्लाई चेन (Supply Chain) को मैनेज करते हैं.
- ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग: टाटा, मारुति या महिंद्रा जैसी बड़ी कार कंपनियों में गाड़ियों के बनने की रफ्तार को सुधारने और वेस्टेज को कम करने का काम इन्हीं का होता है.
- हेल्थकेयर और हॉस्पिटल्स: बड़े अस्पतालों में मरीजों का इंतजार कम करना और डॉक्टरों के समय का सही उपयोग करने के लिए भी अब इनकी मदद ली जाती है.
- आईटी और कंसल्टिंग: बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां जैसे TCS, Infosys और एक्सेंचर भी इंडस्ट्रियल इंजीनियर्स को ‘बिजनेस एनालिस्ट’ के तौर पर हायर करती हैं.
क्या इस फील्ड में कोडिंग और AI का स्कोप है?
आज के समय में इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग पूरी तरह से डिजिटल हो चुकी है. मॉडर्न इंडस्ट्रियल इंजीनियर्स को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML) और बिग डेटा (Big Data) जैसी नई टेक्नोलॉजी का यूज करना सिखाया जाता है. वे कोडिंग और डेटा का इस्तेमाल करके यह अनुमान लगाते हैं कि भविष्य में फैक्ट्री की कौन सी मशीन खराब हो सकती है या बाजार में किस सामान की मांग बढ़ने वाली है. इसलिए इसे “फ्यूचर-रेडी” ब्रांच माना जा रहा है.
BTech Industrial Engineering: सैलरी और करियर ग्रोथ
इस ब्रांच का सीधा कनेक्शन कंपनी के मुनाफे और मैनेजमेंट से होता है, इसलिए इन्हें बहुत तेजी से प्रमोशन मिलता है. शुरुआत में एक इंडस्ट्रियल इंजीनियर को 5 से 8 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिल जाता है.
जैसे-जैसे आपका अनुभव बढ़ता है, आप सप्लाई चेन मैनेजर, ऑपरेशंस हेड, कंसलटेंट और यहां तक कि कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) या सीईओ (CEO) जैसी टॉप पोजीशन पर पहुंच सकते हैं.
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