BTech Materials Science: ज्यादातर स्टूडेंट्स इंजीनियरिंग में एडमिशन लेते समय सबसे पहले कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (CSE) को ही प्राथमिकता देते हैं. लेकिन टेक्नोलॉजी की दुनिया सिर्फ कोडिंग और सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं है. असली बदलाव उन नए और अच्छे मटेरियल्स से आता है, जिनसे चिप, बैटरी, मोबाइल, इलेक्ट्रिक कार, रॉकेट और मेडिकल टूल तैयार होते हैं. यही कारण है कि BTech Materials Science आज तेजी से उभरता हुआ सेक्टर बन रहा है.
सेमीकंडक्टर, नैनो टेक्नोलॉजी, स्पेस रिसर्च और ग्रीन एनर्जी जैसे फ्यूचर के सेक्टर इसी ब्रांच पर निर्भर हैं. अगर आप टेक्नोलॉजी की नींव को समझना चाहते हैं और रिसर्च व इनोवेशन में करियर बनाना चाहते हैं, तो यह कोर्स आपके लिए एक बेहतरीन ऑप्शन साबित हो सकता है. आइए जानते हैं कि BTech Materials Science क्या है. साथ ही इस फील्ड में क्या करियर विकल्प है.
Materials Science क्या है?
मेटेरियल साइंस एक ऐसी इंजीनियरिंग ब्रांच है, जिसमें मेटल्स, सिरेमिक, पॉलिमर, सेमीकंडक्टर और नैनो टेक्नोलॉजी जैसे मेटेरियल की संरचना और कैसे यूज करना है, इसकी पढ़ाई कराई जाती है. इस कोर्स में इलेक्ट्रॉनिक मेटेरियल,पॉलिमर साइंस, नैनोमेटेरियल, Physical Metallugy और मेटेरियल Characterization Techniques जैसे सब्जेक्ट पढ़ाए जाते हैं.
क्यों है यह फ्यूचर का सेक्टर?
सेमीकंडक्टर और चिप टेक्नोलॉजी- भारत में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पर तेजी से काम हो रहा है. बेहतर चिप बनाने के लिए नए मटेरियल की जरूरत होती है.
इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और बैटरी टेक्नोलॉजी- लिथियम-आयन बैटरियों से आगे बढ़कर सॉलिड-स्टेट बैटरी पर रिसर्च हो रही है, जो Materials Science का ही हिस्सा है.
स्पेस और डिफेंस सेक्टर- हल्के और मजबूत मिश्र धातु (Alloys) रॉकेट और विमान निर्माण में बेहद जरूरी हैं.
नैनो टेक्नोलॉजी- नैनो मटेरियल फ्यूचर की मेडिकल और इलेक्ट्रॉनिक क्रांति का आधार हैं.
BTech Materials Science: सैलरी और ग्रोथ
मेटेरियल साइंस कोर्स करने के बाद शुरुआती सैलरी लगभग 6 से 10 लाख प्रतिवर्ष हो सकती है. रिसर्च या सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में एक्सपिरियंस बढ़ने के साथ पैकेज और भी ज्यादा हो सकता है.
टॉप यूनिवर्सिटी
भारत में कई ऐसे टॉप कॉलेज हैं, जहां बीटेक मेटेरियल साइंस (BTech Materials Science) की पढ़ाई होती है. नीचे यूनिवर्सिटी के नाम दिए गए हैं-
- IIT बॉम्बे
- IIT कानपुर
- NIT राउरकेला
- VIT वेल्लोर
- IIT खड़गपुर
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