NEET UG में 11 लाख से ज्यादा पास, MBBS की सीटें सिर्फ 1.36 लाख, जानें एडमिशन का पूरा गणित

NEET UG 2026 Counselling: नीट यूजी 2026 का रिजल्ट आने के बाद लाखों छात्रों के मन में एक ही सवाल है कि अब MBBS में एडमिशन कैसे मिलेगा. सिर्फ परीक्षा पास कर लेना ही काफी नहीं होता. असली मुकाबला काउंसलिंग के दौरान शुरू होता है.

NEET UG 2026 Counselling: नीट यूजी परीक्षा में इस साल करीब 11.21 लाख उम्मीदवार NEET UG में क्वालिफाई हुए हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेजों में सीटें इनकी तुलना में काफी कम हैं. नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) की तरफ से जारी सीट मैट्रिक्स रिपोर्ट के अनुसार, MBBS कोर्स के लिए कुल 823 कॉलेजों में 1,36,939 सीटें हैं. ऐसे में एडमिशन कैसे होता है, काउंसलिंग में क्या-क्या होता है, इन सभी सवालों का जवाब यहां जानते हैं.

11 लाख छात्रों के लिए कितनी हैं MBBS सीटें?

नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के हालिया आंकड़ों के अनुसार देशभर में मेडिकल कॉलेजों और MBBS सीटों की संख्या लगातार बढ़ रही है. इसके बावजूद सीटों और उम्मीदवारों के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है. सीटों की डिटेल्स नीचे टेबल में देख सकते हैं-

विवरणआंकड़े
कुल मेडिकल कॉलेज823
कुल MBBS सीटें1,36,939
सरकारी MBBS सीटें63,296
प्राइवेट MBBS सीटें73,643
हाल में बढ़ी नई सीटें9,911
NEET UG 2026 में क्वालिफाई छात्रलगभग 11.21 लाख

अगर इन आंकड़ों को आसान भाषा में समझें तो लगभग हर 8 क्वालिफाई छात्रों में से सिर्फ 1 छात्र को MBBS सीट मिल पाती है. वहीं अगर सिर्फ सरकारी मेडिकल कॉलेजों की बात करें तो मुकाबला और भी कठिन हो जाता है. यहां लगभग हर 17 छात्रों में से सिर्फ 1 छात्र को सरकारी सीट मिलने की संभावना रहती है.

NEET UG Counselling की रेस

NEET का रिजल्ट आने के बाद एडमिशन सीधे कॉलेज में नहीं होता. इसके लिए काउंसलिंग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. आपकी रैंक, कैटेगरी, पसंदीदा कॉलेज और उपलब्ध सीटों के आधार पर सीट अलॉट की जाती है.

काउंसलिंग के दौरान छात्रों को अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स भरने होते हैं. इसके बाद मेरिट के आधार पर सीट आवंटित होती है. यदि पहली पसंद नहीं मिलती है तो अगले राउंड में बेहतर कॉलेज मिलने का मौका भी मिलता है.

AIQ और State Quota में क्या होता है अंतर?

MBBS एडमिशन की काउंसलिंग मुख्य रूप से दो हिस्सों में होती है- AIQ और स्टेट कोटा. इसमें ऑल इंडिया कोटा यानी AIQ में 15% सीटें होती हैं. जबकि स्टेट कोटा में 85 फीसदी सीटें रहती हैं.

  • ऑल इंडिया कोटा (AIQ)- इसकी काउंसलिंग मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) कराती है. इसमें सरकारी मेडिकल कॉलेजों की 15 प्रतिशत सीटें, AIIMS, JIPMER, डीम्ड यूनिवर्सिटी और कई सेंट्रल लेवल के इंस्टीट्यूट की सीटें शामिल होती हैं. देश का कोई भी NEET क्वालिफाई छात्र इसमें आवेदन कर सकता है.
  • स्टेट कोटा- इसकी काउंसलिंग संबंधित राज्य की एजेंसी कराती है. जैसे बिहार में BCECEB और उत्तर प्रदेश में DGME. इसमें राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों की 85 प्रतिशत सीटें और राज्य के निजी मेडिकल कॉलेजों की सीटें शामिल रहती हैं. अधिकांश मामलों में आवेदन के लिए उस राज्य का डोमिसाइल जरूरी होता है.

NEET UG में रैंक वाइज डिटेल्स


4 राउंड में होगी NEET UG काउंसलिंग

MBBS एडमिशन एक ही बार में पूरा नहीं होता. इसके लिए कई राउंड आयोजित किए जाते हैं. बता दें कि हर राउंड में समय पर रजिस्ट्रेशन, चॉइस फिलिंग और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन करना बेहद जरूरी होता है

  1. राउंड 1- रजिस्ट्रेशन, कॉलेज चॉइस भरना और पहली सीट अलॉटमेंट. इसमें फ्री एग्जिट का विकल्प भी मिलता है.
  2. राउंड 2- बची हुई सीटों और अपग्रेडेशन के लिए यह राउंड होता है.
  3. मॉप-अप राउंड- जिन सीटों पर अब तक एडमिशन नहीं हुआ, उन्हें भरने के लिए यह चरण आयोजित किया जाता है.
  4. स्ट्रे वैकेंसी राउंड- आखिरी बची हुई सीटों पर एडमिशन इसी चरण में होता है.

NEET का रिजल्ट सिर्फ पहला पड़ाव है. सही कॉलेज चुनना, समय पर काउंसलिंग में हिस्सा लेना और सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखना उतना ही जरूरी है. कई छात्र अच्छी रैंक होने के बावजूद गलत चॉइस फिलिंग या समय पर रिपोर्टिंग नहीं करने के कारण बेहतर सीट से चूक जाते हैं.

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लेखक के बारे में

रवि मल्लिक पिछले 7 सालों से डिजिटल पत्रकारिता से जुड़े हैं. स्कूली शिक्षा से लेकर नौकरी तक की खबरों पर काम करना पसंद है. युवाओं को बेहतर करियर ऑप्शन, करंट अफेयर्स और नई वैकेंसी के बारे में बताना अच्छा लगता है. बोर्ड परीक्षा हो या UPSC, JEE और NEET एग्जाम टॉपर्स से बात करना और उनकी स्ट्रेटजी के बारे में जानना पसंद है. युवाओं को प्रेरित करने के लिए उनके बीच के मुद्दों को उठाना और सही व सटीक जानकारी देना ही उनकी प्राथमिकता है.

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