मुसीबत का पैसा कहां छुपाएं, सेविंग्स अकाउंट, FD या फिर म्यूचुअल फंड?

Emergency Fund: मुसीबत के समय काम आने वाले पैसे को कहां और कैसे बचाएं? जानिए पैसे को सुरक्षित रखने का सबसे आसान और प्रैक्टिकल तरीका.

Emergency Fund: आपातकालीन फंड (Emergency Fund) यानी मुसीबत के समय काम आने वाला पैसा. सब जानते हैं कि नौकरी छूटने, बीमारी या किसी बड़े संकट के लिए पैसे अलग रखने चाहिए. लेकिन सबसे बड़ी उलझन यह होती है कि इस पैसे को रखें कहां?

कुछ लोग इसे नॉर्मल सेविंग्स अकाउंट में छोड़ देते हैं जहां ब्याज ना के बराबर मिलता है. कुछ लोग फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में लॉक कर देते हैं, जिससे जरूरत के वक्त पैसा निकालना मुश्किल हो जाता है. वहीं कुछ लोग ज्यादा मुनाफे के चक्कर में इसे शेयर बाजार में लगा देते हैं, जहां मंदी आने पर पैसा डूबने का खतरा रहता है. इमरजेंसी फंड का असली मकसद रिटर्न कमाना नहीं, बल्कि सुरक्षा और जरूरत के वक्त तुरंत पैसा मिलना है.

पूरा पैसा एक ही जगह क्यों न रखें?

नॉर्मल सेविंग्स अकाउंट में कुछ पैसा रखना जरूरी है क्योंकि अचानक कोई मेडिकल बिल आ जाए या सैलरी आने में देरी हो, तो तुरंत भुगतान करने के लिए अकाउंट में पैसा होना चाहिए. लेकिन अगर आप अपना पूरा फंड सालों तक इसमें रखेंगे, तो बढ़ती महंगाई आपके पैसे की कीमत कम कर देगी. इसीलिए समझदारी इसी में है कि आप अपने इमरजेंसी फंड को एक जगह रखने के बजाय अलग-अलग हिस्सों (Layers) में बांट दें.

क्या स्वीप-इन (Sweep-in) अकाउंट बेस्ट है?

सैलरी वाले लोगों के लिए ऑटो-स्वीप फैसिलिटी एक बेहतरीन ऑप्शन है. इसमें एक तय लिमिट से ज्यादा का पैसा अपने आप FD में बदल जाता है. इस पर ब्याज ज्यादा मिलता है, और जब भी आपको पैसों की जरूरत होती है, आप इसे बिना किसी पेनल्टी के तुरंत निकाल सकते हैं. 

FD और लिक्विड फंड का इस्तेमाल कैसे करें?

अगर आप FD करा रहे हैं, तो एक बड़ी FD करने के बजाय छोटे-छोटे टुकड़ों में शॉर्ट-टर्म FD कराएं. इससे फायदा यह होगा कि जरूरत पड़ने पर आपको पूरा डिपॉजिट तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसके अलावा, जो लोग थोड़ी बहुत मार्केट की समझ रखते हैं, वे ‘लिक्विड म्यूचुअल फंड’ चुन सकते हैं. ये फंड्स बेहद सुरक्षित शॉर्ट-टर्म डेट साधनों में निवेश करते हैं. इनमें बैंक जितना इंस्टेंट तो नहीं, पर बहुत जल्दी पैसा वापस मिल जाता है. 

शुरुआत कैसे करें और किन गलतियों से बचें?

अक्सर लोग 6 महीने या साल भर का बड़ा टारगेट देखकर शुरुआत ही नहीं करते. जरूरी यह है कि आप छोटी रकम से ही सही, पर शुरुआत करें. सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोग इस पैसे को अपनी रोजमर्रा की आदतों जैसे शॉपिंग या वेकेशन पर खर्च कर देते हैं. इससे बचने के लिए इमरजेंसी फंड को अपने रेगुलर अकाउंट से अलग रखें ताकि बार-बार खर्च करने का मन न करे. 

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लेखक के बारे में

Published by: Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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