अक्सर खबरों में सुनने को मिलता है कि किसी कारोबारी, नेता या बड़ी कंपनी पर इनकम टैक्स विभाग ने रेड (IT Raid) डाली. इसके बाद करोड़ों रुपये कैश, सोना, गहने या अहम दस्तावेज मिलने की बातें सामने आती हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इनकम टैक्स की रेड आखिर पड़ती क्यों है? और अब तक भारत की सबसे बड़ी रेड कौन-सी रही है? आइए जानते हैं.
आखिर IT Raid कब और क्यों होती है?
इनकम टैक्स विभाग तब रेड करता है, जब उसे पक्की जानकारी मिलती है कि किसी व्यक्ति या संस्था ने अपनी असली कमाई छिपाई है या टैक्स चोरी की है.
रेड का मकसद होता है:
- छिपी हुई आय और संपत्ति का पता लगाना
- ब्लैक मनी पर रोक लगाना
- टैक्स नियमों का पालन सुनिश्चित करना
- गलत तरीके से रखे गए कैश और दस्तावेजों की जांच करना
यानी रेड का उद्देश्य सिर्फ पैसा पकड़ना नहीं, बल्कि टैक्स सिस्टम को पारदर्शी बनाना भी है.
किन मामलों ने पूरे देश का ध्यान खींचा?
भारत में कई ऐसी रेड हुईं, जो लंबे समय तक चर्चा में रहीं.
- 2016, बेंगलुरु: दो इंजीनियरों और ठेकेदारों के यहां करीब ₹5.7 करोड़ नकद, 7 किलो सोना और 9 किलो ज्वेलरी मिली.
- 2015, 'बाहुबली' फिल्म के निर्माता: हैदराबाद में हुई कार्रवाई के दौरान ₹60 करोड़ के विमुद्रीकृत नोट मिलने की बात सामने आई.
- 2019, चेन्नई: एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज के कर्मचारियों के करीब 400 बैंक खातों में ₹8 करोड़ की अघोषित रकम मिली.
- 2014, सहारा ग्रुप: कथित टैक्स चोरी और वित्तीय गड़बड़ियों की जांच के लिए बड़ी कार्रवाई हुई.
- 2022: ऑक्सफैम इंडिया और सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR) में FCRA फंड से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई.
- 2022: पंजाब में भूपिंदर सिंह हनी के यहां कार्रवाई में ₹10 करोड़ से ज्यादा नकद, सोना और महंगी घड़ी बरामद हुई.
भारत की सबसे लंबी IT Raid कौन-सी थी?
1981 में पूर्व सांसद और उद्योगपति सरदार इंदर सिंह के यहां हुई कार्रवाई को भारत की सबसे लंबी इनकम टैक्स रेड माना जाता है. इस ऑपरेशन में 90 से ज्यादा इनकम टैक्स अधिकारी और करीब 200 पुलिसकर्मी शामिल थे. कानपुर, दिल्ली और मसूरी समेत कई जगहों पर एक साथ कार्रवाई हुई. जांच के दौरान नकदी, सोना, गहने और फिक्स्ड डिपॉजिट मिले. यह पूरी जांच करीब एक महीने तक चली, इसलिए इसे भारत की सबसे लंबी IT Raid माना जाता है.
