आटा के भाव में लगी महंगाई की आग, 6 महीने के उच्च स्तर पर गेहूं के दाम,सरकार ने राहत देने के लिए किया ये इंतजाम

महंगाई की मार: पिछले चार महीने में गेहूं की कीमतों में करीब 18 फीसदी की तेजी आई है. वहीं, सरकारी गोदाम में एक अगस्त के स्टॉक के हिसाब से 28.3 मिलियन मीट्रिक टन गेहूं का स्टॉक था जो एक साल पहले 26.6 मिलियन मीट्रिक टन हुआ करता था.

टमाटर के साथ हरी सब्जियों के बढ़ रहे दाम ने वेज थाली की कीमत करीब 34 प्रतिशत तक बढ़ा दी है. अब त्योहारी सीजन से पहले एक बड़ी खबर आ रही है. बताया जा रहा है कि गेहूं के दाम छह महीने में सबसे उच्च स्तर पर जा पहुंची है. गेहूं के दाम में उछाल ऐसे वक्त में हो रहा है जब त्योहारी सीजन में इसकी मांग बढ़ने वाली है. बताया जा रहा है कि सरकार ने कीमतों पर अंकुश के लिए खुले बाजार में अतिरिक्त 50 लाख टन गेहूं और 25 लाख टन चावल बेचने की घोषणा की है. इसके साथ ही, समझा जा रहा है कि आने वाले दिनों में गेहूं की कीमतों अगर कम नहीं हुई तो केंद्र सरकार के द्वारा इसपर लगने वाले इंपोर्ट पर ड्यूटी को खत्म कर सकती है. आने वाले दिनों में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसके साथ ही, 2024 में लोकसभा चुनाव है. इसे देखते हुए केंद्र सरकार हर संभव कोशिश कर रही है कि खाने-पीने की चीजों पर बढ़ रहे महंगाई को नियंत्रित किया जाए.

आटा और इससे बनने वाले उत्पाद भी महंगे

गेहूं की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच आटा से लेकर उससे बनने वाले उत्पाद तक की कीमतें लगातार इजाफा हो रहा है. जून महीने में खाद्य महंगाई दर 2.96 फीसदी से बढ़कर 4.49 फीसदी पर जा पहुंची. और गेहूं की कीमतों में ये तेजी जारी रही तो खाद्य महंगाई में और भी उछाल देखने को मिल सकता है. एक रिपोर्ट के अनुसार, गेहूं का उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्यों के किसानों के द्वारा सप्लाई ठप्प हो गयी है. ऐसे में आटा मिल में गेहूं के पर्याप्त स्टॉक नहीं है. इंदौर में गेहूं के दामों में 1.5 फीसदी का उछाल आया है और ये 25,446 रुपये प्रति मीट्रिक टन पर जा पहुंची है जो 10 फरवरी 2023 के बाद सबसे अधिक है.

18 प्रतिशत बढ़े गेहूं के दाम

मध्य प्रदेश पिछले चार महीने में गेहूं की कीमतों में करीब 18 फीसदी की तेजी आई है. वहीं, सरकारी गोदाम में एक अगस्त के स्टॉक के हिसाब से 28.3 मिलियन मीट्रिक टन गेहूं का स्टॉक था जो एक साल पहले 26.6 मिलियन मीट्रिक टन हुआ करता था. व्यापारियों का कहना है कि सरकार के अपने पास स्टॉक में रखे गेहूं को ओपन मार्केट में बेचना चाहिए. इससे दाम को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी. वहीं, केंद्र सरकार के द्वारा दाम पर नियंत्रण करने के लिए पिछले हफ्ते संकेत दिया गया है. सरकार ने साफ संकेत दिया था कि वो गेहूं के इंपोर्ट पर लगने वाले 40 फीसदी ड्यूटी को खत्म कर सकती है. कीमतों में कमी के लिए इंपोर्ट बेहद जरुरी है. बता दें कि इस वर्ष देश में गेंहू की अच्छी पैदावार हुई थी. मगर फिर भी, केंद्र सरकार के द्वारा गेहूं के एक्सपोर्ट पर लगे रोक को नहीं हटाया.

मजबूत हाजिर मांग से धनिया के वायदा भाव में तेजी

हाजिर बाजार में मजबूती के रुख के रुख को देखते हुए सटोरियों ने अपने सौदों के आकार को बढ़ाया जिससे वायदा कारोबार में धनिया की कीमत 10 रुपये की तेजी के साथ 7,444 रुपये प्रति क्विंटल हो गई. एनसीडीईएक्स में धनिया के अगस्त महीने में आपूर्ति वाले अनुबंध की कीमत 10 रुपये या 0.13 प्रतिशत की तेजी के साथ 7,444 रुपये प्रति क्विंटल हो गई। इसमें 9,295 लॉट के लिए कारोबार हुआ. बाजार विश्लेषकों ने कहा कि हाजिर बाजार में मजबूती के रुख और उत्पादक क्षेत्रों से मामूली आपूर्ति के कारण मुख्यत: धनिया वायदा कीमतों में तेजी आई.

अत्यधिक आयात से खाद्य तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट जारी

विदेशों में मंदी तथा बंदरगाहों पर आयात की भारी खेप जमा होने के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को सरसों, मूंगफली एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल और बिनौला तेल सहित सभी तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट आई. स्थिति कुछ ऐसी है कि अत्यधिक आयात होने के कारण सस्ते आयातित तेल भी अब ठीक से खप नहीं पा रहे हैं, तो ऐसे में सरसों और सूरजमुखी तिलहन कहां से खपेंगे. आयातित तेलों की कीमत इन तेलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी काफी कम है. शिकॉगो एक्सचेंज और मलेशिया एक्सचेंज में गिरावट चल रही है. बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि बंदरगाहों पर आयातित खाद्य तेलों के लदे कई जहाज खड़े हैं और खाली करने के लिए स्थान की कमी हो रही है जिसके एवज में आयातकों को इन जहाजों के लिए ‘डेमरेज’ शुल्क बंदरगाह पर अदा करना पड़ रहा है जिसका बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा में भुगतान करना होता है. अजीबोगरीब स्थिति यह है कि बैंकों में ऋण साख पत्र धुमाते रहने के लिए इन आयातित तेलों को भी लागत से कहीं कम कीमत पर बेचा जा रहा है। ऐसे में बैंकों को नुकसान होगा. तेल संगठनों को इस स्थिति की जानकारी सरकार को देनी चाहिये और खाद्य तेलों से लदे जहाजों को खाली करवाने का इंतजाम करवाना चाहिये.

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