Energy Crisis: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव अब चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है और इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ने लगा है. तेल और गैस की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि वहां असल में क्या चल रहा है और दुनिया भर की सरकारें इसे काबू करने के लिए क्या कर रही हैं.
पिछले गुरुवार को ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत 1.18% बढ़कर $108.65 प्रति बैरल तक पहुंच गई. यह जुलाई 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है. यूरोप में तो और भी बुरा हाल है, जहाँ नेचुरल गैस की कीमतें एक ही दिन में 13% बढ़ गईं. जब से यह युद्ध (28 फरवरी) शुरू हुआ है, तब से गैस की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं.
क्यों बढ़ी इतनी महंगाई ?
कीमतों में इस आग की मुख्य वजह युद्ध का और भड़कना है इजरायल ने ईरान के ‘साउथ पार्स गैस फील्ड’ पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने कतर की LNG सुविधाओं को निशाना बनाया. दूसरी तरफ इराक ने अपने सभी विदेशी तेल क्षेत्रों में ‘फोर्स मेज्योर’ (काम रोकने की घोषणा) लागू कर दिया है. ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में सैन्य हलचल की वजह से इराक का ज्यादातर कच्चा तेल बाहर नहीं जा पा रहा है.
इतने तनाव के बीच शुक्रवार (20 मार्च 2026) को एक उम्मीद की किरण जागी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर संकेत दिया कि अमेरिका अब ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को कम कर सकता है. ट्रंप ने लिखा “हम अपने लक्ष्यों को पूरा करने के बेहद करीब हैं और अब सैन्य प्रयासों को कम करने पर विचार कर रहे हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा अब उन देशों को करनी चाहिए जो इसका इस्तेमाल करते हैं, अमेरिका अकेले यह जिम्मेदारी नहीं उठाएगा.”
ईरानी तेल पर पाबंदी में ढील
बाजार को राहत देने के लिए अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाया है. 19 अप्रैल, 2026 तक ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री पर लगी पाबंदियों में अस्थायी ढील दी गई है. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने बताया कि फिलहाल चीन सस्ते दाम पर ईरानी तेल जमा कर रहा है. इस पाबंदी को हटाने से दुनिया भर के बाजारों में करीब 14 करोड़ बैरल तेल आएगा, जिससे सप्लाई की कमी दूर होगी और कीमतें नीचे आ सकती हैं.
ईरान का रुख: बातचीत का रास्ता खुला ?
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी नरमी के संकेत दिए हैं. उन्होंने कहा कि ईरान ने रणनीतिक समुद्री रास्ता (होर्मुज) बंद नहीं किया है, बल्कि सिर्फ उन देशों के जहाजों पर पाबंदी लगाई है जो उस पर हमला कर रहे हैं. उन्होंने जापान जैसे देशों के जहाजों को सुरक्षा और सहयोग देने का भरोसा दिलाया है.
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