20,000 करोड़ रुपये के कर विवाद में वोडाफोन ने भारत सरकार से केस जीता

vodafone telecom company wins international arbitration against India government : वोडाफोन ने पिछली तिथि से कर लगाये जाने के 20,000 करोड़ रुपये के मामले में भारत के खिलाफ जीत हासिल की है. सूत्रों ने यह जानकारी दी. सूत्रों के अनुसार हेग अदालत ने यह व्यवस्था दी कि भारतीय कर विभाग का कदम निष्पक्ष और समान व्यवहार का उल्लंघन है. उसने कहा कि वोडाफोन ने पिछली तिथि से कर लगाये जाने के 20,000 करोड़ रुपये के मध्यस्थता मामले में भारत के खिलाफ जीत हासिल की है.

नयी दिल्ली : ब्रिटेन की दूरसंचार कंपनी वोडफोन ग्रुप पीएलसी ने पिछली तिथि से लागू कर कानून के तहत 22,100 करोड़ रुपये की आयकर विभाग की कर मांग के मामले में भारत सरकार के खिलाफ मध्यस्थता अदालत में लड़े गये मुकद्दमे में जीत हासिल की है. एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने शुक्रवार को व्यवस्था दी कि भारत की पिछली तिथि से कर की मांग करना द्विपक्षीय निवेश संरक्षण समझौते के तहत निष्पक्ष व्यवहार के खिलाफ है.

वोडाफोन समह ने एक बयान में कहा, ‘‘फैसला गोपनीय है लेकिन वोडाफोन इसकी पुष्टि कर सकती है कि न्यायाधिकरण ने वोडाफोन के पक्ष में चीजों को पाया है.” फिलहाल यह पता नहीं चल पाया है कि क्या भारत सरकार मध्यस्थता अदालत के फैसले को स्वीकार करेगी. मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि मामले में भारत सरकार की देनदारी करीब 75 करोड़ रुपये तक होगी. इसमें 30 करोड़ रुपये लागत और 45 करोड़ रुपये कर वापसी शामिल है. वोडाफोन ने भारत सरकार के पिछली तिथि से कर लगाने के कानून के तहत उससे की गई कर मांग के खिलाफ मध्यस्थता अदालत में चुनौती दी थी. सरकार ने 2012 में पारित एक कानून के जरिये पिछली तिथि में हुये सौदों पर कर लगाने का अधिकार हासिल कर लिया था.

सरकार ने इसी कानून के तहत वोडाफोन द्वारा हचीसन व्हाम्पाओ के मोबाइल फोन कारोबार में 67 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के 11 अरब डॉलर के सौदे में पूंजीलाभकर की मांग की थी. वोडाफोन और हचीसन के बीच यह सौदा 2007 में हुआ था. कंपनी ने नीदरलैंड-भारत द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) के तहत भारत सरकार की कर मांग को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत में चुनौती दी. कंपनी से इस सौदे में पूंजीगत लाभ कर के रूप में 7,990 करोड़ रुपये (ब्याज और जुर्माना मिलाकर 22,100 करोड़ रुपये) की मांग की गई थी.

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सूत्रों ने कहा कि कर मांग ब्रिटेन में सूचीबबद्ध कंपनी पर थी और वोडाफोन की भारतीय उद्यम पर इसकी कोई देनदारी नहीं है. वोडाफोन ने अपने भारतीय दूरसंचार परिचालन का उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला की कंपनी आइडिया में विलय किया. लेकिन विलय के बाद अस्तित्व में आयी कंपनी वोडाफोन आइडिया लि. 7.8 अरब डॉलर की पिछले सरकारी बकाये की मांग से जूझ रही है. कर प्राधिकरण ने सितंबर 2007 में वोडाफोन इंटरनेशनल होल्डिग्स बीवी को नोटिस जारी किया था. नोटिस में कंपनी पर हच्चिसन टेलीकम्युनिकेशंस इंटरनेशनल लि. को उसकी हिस्सेदारी खरीद के लिये किये गये भुगतान पर विदहोल्डिंग कर (स्रोत पर कर कटौती) काटने में असफल रहने की बात कही गई थी.

वोडाफोन ने इस नोटिस को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जिसने 2012 में मामले का निपटान करते हुए कहा कि इस सौदे पर भारत में कर नहीं बनता और कंपनी को विदहोल्डिंग कर देने को लेकर कोई बाध्यता नहीं है. उसके बाद उसी साल मई में संसद ने वित्त कानून 2012 पारित किया जिसमें पूर्व की तिथि से कर के साथ आयकर कानून 1961 के विभिन्न प्रावधानों को संशोधित किया गया. इसके जरिये यह व्यवस्था की गयी कि भारत स्थित संपत्तियों से कमाई वाले किसी सौदे में यदि विदेशी कंपनी में शेयरों का हस्तांरण हुआ है तो ऐसे सौदे से होने वाले लाभ पर पिछली तिथि से कर लगाया जा सकेगा. इसके बाद कंपनी को जनवरी 2013 में कर की मूल राशि के ऊपर ब्याज लगाकर 14,200 करोड़ रुपये का कर नोटिस दिया गया.

एक साल बाद वोडाफोन ने कर मांग को नीदरलैंड बीआईटी में चुनौती दी. सूत्रों ने कहा कि अदालत के बाहर मामले का समाधान नहीं हो पाने के बाद कंपनी ने अप्रैल 2014 में मध्स्थता का नोटिस दिया. कर विभाग ने 2016 में 22,100 करोड़ रुपये के कर की मांग को लेकर नोटिस दिया. वोडाफोन हमेशा कहती रही कि उस पर कोई देनदारी नहीं बनती और वह वोडाफोन इंडिया लि. से हच्चिसन सौदे को लेकर की जा रही कर मांग का पुरजोर विरोध करती रहेगी. वोडाफोन के अलावा भारत सरकार ने पूर्व की तिथि से कर कानून का उपयोग करते हुये ब्रिटेन की तेल खोज कार्य करने वाली कंपनी केयर्न एनर्जी से 10,247 करोड़ रुपये की मांग की थी. यह मांग कंपनी से 2006 में उसके भारतीय कारोबार का पुनर्गठन करने को लेकर की गयी थी.

Posted By : Rajneesh Anand

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