Crude Oil: दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर आसमान छूने लगी हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी के बाद ब्रेंट क्रूड $110.74 प्रति बैरल पर पहुंच गया है. जानकारों का मानना है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो यह आंकड़ा $150 तक जा सकता है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका होगा.
क्यों लग रही है तेल में आग?
अमेरिका और ईरान के बीच धमकियों का दौर जारी है. ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई रूट (होर्मुज) को बंद करने की बात कही है. इस रास्ते से दुनिया का 20% कच्चा तेल और गैस गुजरता है. अगर यह रास्ता बंद हुआ, तो न केवल पेट्रोल-डीजल, बल्कि प्लास्टिक, फर्टिलाइजर और एल्युमीनियम भी महंगे हो जाएंगे.
भारत की सबसे बड़ी चिंता
भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल बाहर से खरीदता है. अगर साल भर कच्चे तेल के दाम में सिर्फ $1 की बढ़त रहती है, तो भारत का आयात बिल ₹16,000 करोड़ बढ़ जाता है. और इसी क्रम में डॉलर की मांग बढ़ने से रुपया गिरेगा, जिससे विदेश घूमना, पढ़ना और विदेशी सामान खरीदना महंगा हो जाएगा.
आपकी थाली तक पहुंचेगी आंच
जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो ट्रक और जहाजों का भाड़ा बढ़ जाता है. इससे फल, सब्जी और राशन के दाम सीधे तौर पर बढ़ जाते हैं. कोटक सिक्योरिटीज जैसी बड़ी संस्थाओं ने चेतावनी दी है कि कीमतें $150 तक भी जा सकती हैं.
| बास्केट/क्रूड | 27 फरवरी | 19 मार्च | बढ़ोत्तरी |
| इंडियन बास्केट | $71 | $121 | 71% |
| ओपेक बास्केट | $70 | $111 | 59% |
| ब्रेंट क्रूड | $73 | $112 | 54% |
| WTI क्रूड | $67 | $112 | 67% |
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