Urea Supply in India: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत सरकार ने किसानों के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. भारतीय पोटाश लिमिटेड (IPL) ने 4 अप्रैल, 2026 को भारी मात्रा में यूरिया इंपोर्ट करने के लिए एक ग्लोबल टेंडर जारी किया है. इसका मुख्य ऑब्जेक्टिव यह सुनिश्चित करना है कि दुनिया में चल रही लड़ाइयों या सप्लाई चेन की दिक्कतों का असर भारतीय खेतों और किसानों पर न पड़े.
कितना और कहां आएगा यूरिया?
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की योजना कुल 25 लाख मीट्रिक टन यूरिया खरीदने की है. देश के हर कोने में खाद की समय पर डिलीवरी के लिए इसे दो हिस्सों में बांटा गया है. लगभग 15 लाख टन यूरिया वेस्ट कोस्ट के बंदरगाहों पर उतरेगा, जबकि 10 लाख टन ईस्ट कोस्ट के बंदरगाहों के जरिए देश में आएगा. इससे राज्यों के बीच खाद का संतुलन बना रहेगा.
क्या है टेंडर की समय सीमा?
IPL ने दुनिया भर के यूरिया प्रोड्यूसर्स और ट्रेडिंग कंपनियों को इस टेंडर में शामिल होने का न्योता दिया है. जो भी कंपनियां भारत को यूरिया बेचना चाहती हैं, उन्हें 15 अप्रैल तक अपनी बोलियां (Offers) जमा करनी होंगी. सरकार का लक्ष्य है कि बुवाई के सीजन से पहले ही बफर स्टॉक तैयार कर लिया जाए ताकि खाद की कोई कमी न हो.
मिडिल ईस्ट के संकट का क्या असर?
दुनिया के बड़े हिस्से में खाद का प्रोडक्शन मिडिल ईस्ट के देशों में होता है. वहां जारी तनाव की वजह से सप्लाई रुकने का खतरा बना रहता है. ऐसे में भारत ने ‘प्रोएक्टिव’ रुख अपनाते हुए पहले ही अपनी तैयारी पुख्ता कर ली है. यह कदम देश की खाद्य सुरक्षा (Food Security) को मजबूत करने और खेती की लागत को स्थिर रखने के लिए उठाया गया है.
IPL की क्या है भूमिका?
भारतीय पोटाश लिमिटेड (IPL) खाद मंत्रालय के तहत काम करने वाली एक प्रमुख संस्था है. इसका मुख्य काम विदेशी बाजारों से खाद खरीदकर उसे भारत के गांवों और छोटे शहरों तक पहुंचाना है. IPL का यह बड़ा टेंडर यह साफ करता है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के बावजूद किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है.
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