Tyre Price Hike India: वेस्ट एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब आपकी जेब पर पड़ सकता है. दिग्गज ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए की शुक्रवार 6 मार्च की रिपोर्ट के मुताबिक, इस युद्ध की वजह से भारतीय टायर कंपनियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं. कच्चे माल की कीमतों में 15% से 20% तक का उछाल देखा जा रहा है, जिससे टायर बनाना महंगा हो गया है.
क्यों बढ़ रही है टायर कंपनियों की टेंशन?
टायर बनाने में लगने वाले कच्चे माल का लगभग 45% हिस्सा कच्चे तेल (Crude Oil) से जुड़ा होता है, जबकि बाकी 45% नेचुरल रबर पर निर्भर है. युद्ध के कारण तेल की कीमतों में भारी तेजी आई है. यह 2022 के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त है. इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 91.62 के स्तर पर आ गया है, जिससे बाहर से रबर मंगाना और भी खर्चीला हो गया है.
क्या आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर?
सीएलएसए का अनुमान है कि अगर कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल और रबर 220 रुपये प्रति किलो के आसपास बनी रहती है, तो कंपनियों के मुनाफे (Gross Margin) में 4% तक की गिरावट आ सकती है. इसकी भरपाई के लिए कंपनियां टायर की कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं. रिपोर्ट के अनुसार, रिप्लेसमेंट मार्केट में कीमतों में 4% तक का इजाफा देखा जा सकता है.
शेयर बाजार में कैसा है माहौल?
इस खबर का असर टायर कंपनियों के शेयरों पर भी दिख रहा है. शुक्रवार को जहां CEAT के शेयर 1.8% की बढ़त के साथ 3,473 रुपये पर कारोबार कर रहे थे, वहीं MRF के शेयरों में 1.1% की गिरावट देखी गई और वे 1,38,625 रुपये पर आ गए. एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में कंपनियों के कैश फ्लो और नए प्रोजेक्ट्स (Capex) पर भी इसका दबाव दिख सकता है.
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