ट्रेन में सफर के दौरान सीट बदलना अक्सर छोटी-सी बात लगती है. परिवार के सदस्य साथ बैठना चाहते हैं या किसी सहयात्री से सीट की अदला-बदली करनी होती है, तो लोग बिना ज्यादा सोचे अपनी सीट बदल लेते हैं. हालांकि, रेलवे के नियमों में अपनी मर्जी से किसी दूसरी आरक्षित सीट पर बैठने और आधिकारिक अनुमति के बीच फर्क है. ऐसे में सुविधा के लिए किया गया सीट बदलाव परेशानी खड़ी कर सकता है.
अगर आपकी सीट पसंद नहीं है या आप किसी दूसरी बर्थ पर जाना चाहते हैं, तो खुद से सीट बदलने के बजाय टीटीई (TTE) से बात करना सही तरीका है. किसी दूसरी बर्थ के खाली होने पर नियमों के मुताबिक टीटीई सीट में बदलाव कर सकता है.
क्या अपनी मर्जी से सीट बदल सकते हैं?
किसी सहयात्री से आपसी सहमति से सीट बदलना आसान लग सकता है, लेकिन किसी दूसरे यात्री की आरक्षित सीट पर बिना अनुमति कब्जा करना परेशानी का कारण बन सकता है. खासकर तब, जब उस सीट का असली यात्री वहां पहुंच जाए.
ऐसी स्थिति में विवाद होने के साथ-साथ यात्री पर नियमों के तहत जुर्माना भी लगाया जा सकता है. इसलिए सीट बदलने से पहले टीटीई को जानकारी देना बेहतर है.
खाली बर्थ दिखे तो क्या वहां बैठ सकते हैं?
ट्रेन में कोई बर्थ खाली नजर आने का मतलब यह नहीं है कि यात्री अपनी मर्जी से वहां जाकर बैठ जाए. अगर आपको दूसरी सीट या कोच में जाना है, तो टीटीई से संपर्क करें.
यदि कोई बर्थ खाली है, तो टीटीई रेलवे के नियमों के अनुसार उस पर सीट देने या बदलाव करने का फैसला कर सकता है. इससे सफर के दौरान बेवजह की बहस और जुर्माने से बचने में मदद मिलती है.
क्या ट्रेन टिकट किसी दूसरे को बेच सकते हैं?
कन्फर्म रेलवे टिकट को अपनी मर्जी से किसी दूसरे व्यक्ति को बेचना या यूं ही किसी और को दे देना भी नियमों के खिलाफ है. आरक्षित टिकट की बिक्री रेलवे की अनुमति के बिना करना अपराध माना जाता है.
ऐसा करने पर सिर्फ आर्थिक जुर्माना ही नहीं, बल्कि जेल की सजा भी हो सकती है. इसलिए टिकट किसी दूसरे व्यक्ति को देने या बेचने से पहले रेलवे की अनुमति से जुड़े नियमों को समझना जरूरी है.
वेटिंग टिकट लेकर ट्रेन में चढ़ना कितना सही?
कई यात्री चार्ट तैयार होने के बाद भी वेटिंग टिकट कन्फर्म नहीं होने पर ट्रेन में सफर करने की कोशिश करते हैं. खासकर भीड़ या जरूरी यात्रा के समय लोग इस जोखिम को नजरअंदाज कर देते हैं.
अगर आरक्षित ट्रेन का वेटिंग टिकट चार्ट बनने के बाद भी कन्फर्म नहीं हुआ है और यात्री उससे सफर करता है, तो रेलवे अधिकारी कार्रवाई कर सकते हैं. इसमें जुर्माने के साथ अतिरिक्त किराया भी वसूला जा सकता है.
