चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है. सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता और त्योहारों से पहले बढ़ती मांग के बीच अब कई क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और बड़े रिटेल स्टोर चीनी की खरीद पर लिमिट लगा रहे हैं. BigBasket, Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसे प्लेटफॉर्म ने कुछ इलाकों में तय मात्रा से ज्यादा चीनी खरीदने पर रोक लगाई है. वहीं, DMart और Reliance Retail जैसे बड़े रिटेलर्स ने भी कुछ मामलों में खरीद की सीमा तय की है.
26 अगस्त को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत ₹65.05 प्रति किलो पहुंच गई, जो करीब एक महीने पहले ₹48 प्रति किलो थी.
आखिर कितनी महंगी हुई चीनी?
चीनी के दामों में हाल के हफ्तों में तेज बढ़ोतरी हुई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 20 जुलाई 2026 को चीनी की औसत कीमत ₹48.18 प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर ₹55.70 प्रति किलो हो गई. यानी एक महीने में करीब 16% की तेजी. वहीं, 26 अगस्त तक ऑल-इंडिया औसत खुदरा कीमत ₹65.05 प्रति किलो पहुंच गई. थोक बाजार में भी चीनी करीब ₹60.36 प्रति किलो बिक रही है, जबकि एक महीने पहले इसका भाव करीब ₹45 प्रति किलो था.
BigBasket-Blinkit पर कितनी खरीद सकते हैं?
खरीद की लिमिट हर प्लेटफॉर्म और इलाके में अलग-अलग है. कई जगह ग्राहकों को किसी खास पैक की सिर्फ एक या दो यूनिट ही खरीदने का विकल्प मिल रहा है.
- Blinkit: दिल्ली-NCR में कुछ ब्रांड के 5 किलो वाले पैक की खरीद एक पैक प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित है.
- BigBasket: कुछ ब्रांड की खरीद अधिकतम छह 1 किलो पैक तक सीमित बताई गई है.
- Swiggy Instamart: दिल्ली-NCR के कुछ इलाकों में एक ब्रांड के सिर्फ दो 1 किलो पैक खरीदे जा सकते हैं, जबकि दूसरे ब्रांड के चार 5 किलो पैक तक की सीमा है.
- Zepto: कुछ इलाकों में स्टॉक संभालने के लिए इसी तरह की खरीद सीमा लागू की गई है.
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DMart और Reliance ने क्यों लगाई सीमा?
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ मामलों में DMart और Reliance जैसे रिटेलर्स ने प्रति ग्राहक करीब 2-3 किलो चीनी की खरीद सीमा तय की है. इसका मकसद उपलब्ध स्टॉक को संभालना और एक साथ ज्यादा खरीदारी की वजह से कमी जैसी स्थिति से बचना है. हालांकि, एक बड़े चीनी ब्रांड के अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल बाजार में स्टॉक खत्म होने जैसी स्थिति नहीं है.
त्योहारों से पहले क्यों बढ़ा दबाव?
चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ने की एक बड़ी वजह उत्पादन और खपत का अंतर है. ISMA के अनुमान के मुताबिक, 2025-26 मार्केटिंग ईयर में एथेनॉल के लिए डायवर्जन के बाद देश में नेट चीनी उत्पादन करीब 279 लाख टन रह सकता है.
सीजन की शुरुआत में करीब 50 लाख टन ओपनिंग स्टॉक था, जबकि सालाना घरेलू खपत करीब 280-285 लाख टन आंकी गई है. सितंबर के आखिर तक क्लोजिंग स्टॉक करीब 35 लाख टन रहने का अनुमान है. अब त्योहारों के दौरान मिठाइयों और दूसरी चीजों की मांग बढ़ने से कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है. ऐसे में फिलहाल खरीदारों के लिए सलाह यही है कि जरूरत के हिसाब से खरीदारी करें, क्योंकि अलग-अलग इलाकों और प्लेटफॉर्म पर खरीद की सीमा अलग हो सकती है.
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