चीनी महंगी हुई तो Ethanol पर आया शक, सरकार ने बताया दाम बढ़ने का असली कारण

चीनी के बढ़ते दाम को लेकर सरकार ने सफाई दी है. जानें Ethanol नहीं, किन वजहों से चीनी महंगी हुई और जमाखोरी पर क्या एक्शन होगा.

चीनी के बढ़ते दाम को लेकर सरकार ने अब सख्ती शुरू कर दी है. सरकार ने साफ कहा है कि चीनी महंगी होने की वजह इथेनॉल बनाने के लिए इसका ज्यादा इस्तेमाल नहीं है. देश में घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी मौजूद है. कीमतों में तेजी के पीछे कम प्रोडक्शन, त्योहारों में बढ़ी मांग, खराब मौसम और कुछ लोगों की जमाखोरी जैसे कई कारण बताए गए हैं.

चीनी के दाम आखिर क्यों बढ़ रहे हैं?

डिपार्टमेंट ऑफ फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन ने कहा है कि चीनी की कीमत बढ़ने के पीछे एक नहीं, कई वजहें हैं. इस साल प्रोडक्शन कम रहा है. ऊपर से त्योहारों का सीजन आने से मांग बढ़ गई है. खराब मौसम की वजह से भी चीनी की फसल को नुकसान हुआ है. दुनिया में चीनी की सप्लाई कम होने का असर भी घरेलू बाजार पर पड़ा है. इसके अलावा, सरकार को शक है कि कुछ कारोबारी चीनी जमा करके बाजार में इसकी कमी दिखा रहे हैं. सरकार ने ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है.

क्या इथेनॉल की वजह से चीनी महंगी हुई?

सरकार ने साफ किया है कि मौजूदा तेजी को इथेनॉल से जोड़ना सही नहीं है. आंकड़ों के मुताबिक, इथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में 12% थी, जो 2025-26 में घटकर 9% रह गई है. इतना ही नहीं, अब भारत में बनने वाले करीब तीन-चौथाई इथेनॉल के लिए अनाज का इस्तेमाल होता है. इसमें मक्का सबसे अहम है. यानी इथेनॉल बनाने के लिए चीनी पर निर्भरता पहले के मुकाबले कम हुई है.

ये भी पढ़ें: चीनी के बढ़ते दाम पर सरकार का शिकंजा, 1 सितंबर से स्टॉक रखने पर नई लिमिट

जमाखोरी रोकने के लिए क्या कर रही सरकार?

बाजार में चीनी की कृत्रिम कमी न हो, इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार की टीमें चीनी मिलों में जाकर स्टॉक की जांच कर रही हैं. अधिकारी यह देख रहे हैं कि कागज पर जितनी चीनी दिखाई गई है, उतनी असल में मौजूद भी है या नहीं. सरकार ने चीनी डीलरों के लिए 400 टन की स्टॉक लिमिट तय की है. यह लिमिट 30 नवंबर तक लागू रहेगी. वहीं, 1 सितंबर से थोक खरीदार 15 दिनों से ज्यादा की जरूरत की चीनी जमा नहीं कर सकेंगे.

चीनी की सप्लाई बढ़ाने के लिए क्या हुआ?

सरकार ने बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट को मंजूरी दी है. इससे घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ने और दाम पर दबाव कम होने की उम्मीद है. इसके अलावा, राज्यों और चीनी मिलों से नया पेराई सीजन 15 अक्टूबर से शुरू करने को कहा गया है. अक्टूबर में 10 लाख टन से ज्यादा चीनी बनने की उम्मीद है. इससे त्योहारों के दौरान बाजार में सप्लाई बेहतर हो सकती है और कीमतों को काबू में रखने में मदद मिल सकती है.

ये भी पढ़ें: चीनी के बढ़ते दाम पर सरकार का एक्शन, 31 अक्टूबर तक ड्यूटी फ्री इम्पोर्ट की छूट



प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By सौम्या शाहदेव

सौम्या शाहदेव प्रभात खबर डिजिटल में बिजनेस कंटेंट राइटर हैं. वह शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, टैक्स, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग और रोजमर्रा की आर्थिक खबरों को सरल और सटीक भाषा में पाठकों तक पहुंचाती हैं. उनका फोकस ऐसी खबरें लिखने पर रहता है जो सीधे आम लोगों की जिंदगी और जेब पर असर डालती हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >