Sugar Price: ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने न्यूज एजेंसी ANI के साथ बातचीत में कहा, पिछले 20 दिनों में चीनी के दामों में हुई बढ़ोतरी का कारण वास्तविक किल्लत नहीं, बल्कि सट्टेबाजी और पैनिक बाइंग (घबराहट में की गई खरीदारी) के कारण हुई. उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है. उन्होंने इथेनॉल डायवर्जन (गन्ने को इथेनॉल उत्पादन की तरफ मोड़ना) को भी कीमतों में बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने से इनकार किया और कहा कि घरेलू खपत हमेशा पहली प्राथमिकता रहती है.
- खुदरा कीमतों में उछाल : दीपक बल्लानी ने बताया, जुलाई में चीनी का भाव लगभग 48 रुपये प्रति किलो था, जो अगस्त में सट्टेबाजी के कारण बढ़कर 55-56 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया.
- मजबूत क्लोजिंग स्टॉक : सीजन के अंत तक देश के पास करीब 35 लाख टन का क्लोजिंग स्टॉक रहेगा, जो नवंबर तक की जरूरतों के लिए पर्याप्त है.
- उत्पादन अनुमान : वर्ष 2025-26 में देश का कुल नेट चीनी उत्पादन लगभग 279 लाख टन रहने का अनुमान है.
- 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी : सरकार ने एहतियातन और त्योहारी सीजन में आपूर्ति बनाए रखने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन (1 मिलियन टन) कच्चे चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी है.
डीलरों के लिए 400 टन चीनी की स्टॉक सीमा तय
ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने बताया कि एसोसिएशन ने सरकार से व्यापारियों की स्टॉक सीमा को 400 टन से घटाकर 200 टन करने का अनुरोध किया है, ताकि बाजार में अधिक चीनी जारी हो सके. इसके अलावा, सरकार ने भी सख्त कदम उठाते हुए डीलरों के लिए 400 टन की स्टॉक सीमा, बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए 15 दिन की इन्वेंट्री कैप (स्टॉक रखने की सीमा) और मिलों से चीनी उठाने की 7 दिनों की समयसीमा तय की है.
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