Success Story: नारियल के छिलकों से खड़ा किया करोड़ों का कारोबार, सालाना कमाई 75 करोड़ रुपये

Success Story: नारियल के छिलकों से खड़ा किया करोड़ों का कारोबार, अनोखे आइडिया से सालाना 75 करोड़ रुपये की कमाई, जानिए कैसे शुरू हुआ यह बिजनेस और क्या है इसकी खासियत.

Success Story: अनीस अहमद ने यह साबित कर दिया कि अगर सही सोच और मेहनत हो, तो कोई भी चीज बेकार नहीं होती. उन्होंने नारियल के छिलकों से एक ऐसा बिजनेस खड़ा किया, जो आज सालाना 75 करोड़ रुपये का टर्नओवर कर रहा है. अनीस ग्लोबल ग्रीन नामक एक स्टार्टअप के फाउंडर हैं, जो नारियल के छिलकों से कोकोपीट तैयार करता है. कोकोपीट का इस्तेमाल खेती, नर्सरी और ग्रीनहाउस इंडस्ट्री में किया जाता है. इसके अलावा, इससे कॉयर पॉट, ईंट, ब्लॉक और ग्रो बैग भी बनाए जाते हैं.

कैसे आया बिजनेस का आइडिया?

अनीस अहमद का बचपन से ही खेती की ओर रुझान था. उनके पिता नारियल के कारोबार से जुड़े थे, जिससे उन्होंने खेती और नारियल के महत्व को करीब से समझा. पढ़ाई के दौरान अनीस ने जाना कि कई देशों में पीट मॉस का उपयोग किया जाता है, लेकिन इससे मीथेन गैस निकलती है, जो पर्यावरण के लिए हानिकारक है. उन्होंने इसे बदलने के लिए कोकोपीट को एक बेहतर विकल्प के रूप में देखा और इसी से बिजनेस का आइडिया आया.

2014 में हुई शुरुआत, आज बना करोड़ों का साम्राज्य

अनीस अहमद ने साल 2014 में अपने स्टार्टअप ‘ग्लोबल ग्रीन’ की नींव रखी. इस कंपनी का उद्देश्य नारियल के छिलकों से कोकोपीट बनाना था, जिससे मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में मदद मिलती है. कोकोपीट को पहले पानी से धोकर उसमें मौजूद अशुद्धियों को हटाया जाता है, फिर इसका चूरा बनाया जाता है. बाद में इससे ब्लॉक, डिस्क और ग्रो बैग बनाए जाते हैं और बाजार में बेचे जाते हैं.

विदेशों में भी है कोकोपीट की मांग

आज ग्लोबल ग्रीन सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके उत्पाद अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और मिडिल ईस्ट जैसे देशों में भी एक्सपोर्ट किए जाते हैं. विदेशों में कोकोपीट की भारी मांग है, क्योंकि यह मिट्टी का एक बेहतरीन विकल्प है और फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में मदद करता है.

कोकोपीट के फायदे और बढ़ती मार्केट डिमांड

  • यह पानी को ज्यादा समय तक बनाए रखता है, जिससे पौधों को लगातार नमी मिलती रहती है.
  • पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण इसे ऑर्गेनिक खेती में इस्तेमाल किया जाता है.
  • मिट्टी के कटाव को रोकता है और उसकी उर्वरता को बढ़ाता है.
  • ग्लोबल वॉर्मिंग को कम करने में मदद करता है, क्योंकि यह पीट मॉस का एक बेहतर विकल्प है.

अनीस अहमद की सफलता से सीख

अनीस अहमद की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपने छोटे से आइडिया को बड़ा बिजनेस बनाना चाहते हैं. उनकी सोच, मेहनत और दूरदृष्टि ने उन्हें एक सफल बिजनेसमैन बना दिया. आज उनकी कंपनी न सिर्फ भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बना चुकी है. उनका यह सफर बताता है कि अगर इंसान अपनी सोच को सही दिशा में ले जाए, तो बेकार चीजों से भी करोड़ों का साम्राज्य खड़ा किया जा सकता है.

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लेखक के बारे में

By Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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