Stock Market : शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार भारी दबाव के साथ बंद हुए. इसका सबसे बड़ा कारण रहा रुपया, जो इतिहास में पहली बार डॉलर के मुकाबले ₹96 के स्तर को छू गया. वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों के उत्साह पर पानी फेर दिया.
बाजार का लेखा-जोखा
सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन दोनों मुख्य इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए.
- निफ्टी 50: 46.10 अंक (0.19%) गिरकर 23,643.50 पर बंद हुआ.
- सेंसेक्स: 160.73 अंक (0.21%) की गिरावट के साथ 75,237.99 के स्तर पर रहा.
गिरावट की मुख्य वजहें
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बाजार में इस मंदी के पीछे तीन बड़े फैक्टर रहे:
- कमजोर रुपया: रुपये का ₹96 के पार जाना निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बना.
- महंगा तेल: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 109 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है.
- ग्लोबल बॉन्ड यील्ड: अमेरिका और दुनिया भर में बढ़ती बॉन्ड यील्ड के कारण निवेशकों ने जोखिम भरे एसेट्स (जैसे शेयर) से पैसा निकालना शुरू कर दिया है.
सेक्टर्स का हाल: कहां तेजी, कहां मंदी?
बाजार में आज मिला-जुला रुख देखने को मिला. जहां कुछ सेक्टर्स बुरी तरह पिटे, वहीं कुछ ने अपनी बढ़त बनाए रखी.
- पिटने वाले सेक्टर्स: मेटल (2% की गिरावट), रियल एस्टेट (1.89%), और सरकारी बैंक (1.87%) सबसे ज्यादा नुकसान में रहे.
- दम दिखाने वाले सेक्टर्स: रुपये की कमजोरी का फायदा IT सेक्टर को मिला, जो 1.21% चढ़कर बंद हुआ. इसके अलावा मीडिया (1.58%) और हेल्थकेयर (0.21%) में भी तेजी दिखी.
कमोडिटी बाजार: सोना-चांदी में भारी बिकवाली
शेयर बाजार के साथ-साथ कीमती धातुओं में भी आज बड़ी गिरावट देखी गई.
- सोना: इसमें 2% से ज्यादा की गिरावट आई और यह ₹1,58,633 प्रति 10 ग्राम (24 कैरेट) पर आ गया.
- चांदी: चांदी में तो मानो हड़कंप मच गया, इसकी कीमत 7% तक गिरकर ₹2,70,952 प्रति किलो पर आ गई.
एशियाई बाजारों का बुरा हाल
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया में मंदी का माहौल रहा.
- दक्षिण कोरिया का KOSPI इंडेक्स सबसे ज्यादा 6.52% टूटा.
- जापान का Nikkei 2.70% और हॉन्गकॉन्ग का Hang Seng 1.73% गिरकर बंद हुआ.
विशेषज्ञों की राय
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर का कहना है कि अब निवेशकों की नजर सरकार और RBI के उन कदमों पर है, जो रुपये को संभालने और महंगाई को काबू करने के लिए उठाए जा सकते हैं. आने वाले दिनों में ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात बाजार की दिशा तय करने में बड़ा रोल निभाएगी.
