Stock Market: मंगलवार को शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई. सेंसेक्स 1065 अंक लुढ़क गया और 82,180 पर पहुंच गया. वहीं निफ्टी 353 अंक टूट गया और 25,250 के नीचे गिरकर 25,232 पर बंद हुआ. मार्केट की शुरुआत भी बहुत ही कमजोर स्थिति से हुई थी, जिससे पूरे दिन के लिए एक सावधानी का माहौल बना रहा. रियल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑटो, आईटी, मेटल और फार्मा जैसे सेक्टर्स में दबाव दिखाई दिया. मिड और स्मॉल कैप शेयर्स का प्रदर्शन भी काफी कमजोर रहा.
प्रमुख इंडेक्स
| इंडेक्स | स्तर | गिरावट | % बदलाव |
|---|---|---|---|
| सेंसेक्स | 82,181 | 1,066 ↓ | 1.28% |
| निफ्टी | 25,232 | 353 ↓ | 1.38% |
| BSE मिड कैप | 44,828 | 159 ↓ | 2.52% |
| BSE स्मॉल कैप | 47,719 | 1,344 ↓ | 2.74% |
निफ्टी टॉप गेनर
| शेयर | करंट प्राइस (₹) | बढ़त (₹) | % चेंज |
|---|---|---|---|
| डॉ रेड्डी | 1,172 | 5.40 | +0.46% |
| टाटा कंज्यूमर | 1,183 | 3.30 | +0.28% |
| HDFC बैंक | 930 | 2.60 | +0.28% |
निफ्टी टॉप लूजर
| शेयर | करंट प्राइस (₹) | गिरावट (₹) | % चेंज |
|---|---|---|---|
| अडाणी एंटरप्राइजेज | 2,050 | 84.60 | -3.96% |
| बजाज फाइनेंस | 931 | 37.70 | -3.89% |
| जियो फाइनेंस | 265 | 10.25 | -3.72% |
क्या विश्व में चल रहा है ऐसा ही?
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल फैक्टर्स का बाजार पर दबाव बना हुआ है. अमेरिका की टैरिफ नीति के बारे में अनिश्चितता है, यूएस और जापान में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से निवेशकों का विश्वास कमजोर हुआ है. रुपये की भी स्थिति खराब है और 90.90-91 प्रति डॉलर के आसपास फिसलता दिख रहा है. अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ते तनाव और नए टैरिफ के खतरे से विश्व में इक्विटी मार्केट में डर का माहौल है. जिसका असर भारतीय बाजार पर भी दिख रहा है. इस बीच निवेशक जोखिम भरे निवेश से दूर हो रहे हैं और सोना-चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर झुक रहे हैं.
आगे क्या हो सकता है? मुश्किल समय के बाद भी कोई आशा?
टेक्निकल नजर से बाजार अभी बहुत कमजोर स्थिति में है. निफ्टी लगातार अपने सपोर्ट लेवल तोड़ते दिख रहा है और 25,100-25,150 का स्तर अब बहुत जरूरी माना जा रहा है. अगर यह लेवल संभाले जा सका तो थोड़ी रिकवरी संभव हो सकती है, लेकिन फिलहाल तो संकेत मंदी के ही हैं. आगे बाजार की दिशा तिमाही नतीजों, बजट से जुड़े संकेतों, अमेरिकी ब्याज दरों और जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम पर निर्भर होगी. तब तक निवेशकों के लिए सावधानी बरतना ही बेहतर माना जा रहा है.
