Share Market Updates : हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ (हरे निशान पर) बंद होने में कामयाब रहा. अमेरिका और एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीदों से घरेलू निवेशकों का मनोबल बढ़ा.
इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में आई थोड़ी नरमी और डॉलर के मुकाबले रुपये में सुधार ने भी बाजार को सहारा दिया. कारोबार के अंत में, एनएसई (NSE) का निफ्टी 50 इंडेक्स 0.3 फीसदी की बढ़त के साथ 23,719.30 अंकों पर बंद हुआ. वहीं, बीएसई (BSE) का सेंसेक्स भी 0.3 प्रतिशत से ज्यादा चढ़कर 75,415.35 अंकों पर पहुंच गया.
बाजारों से मिली मजबूती
अमेरिकी शेयर बाजार (Wall Street) में गुरुवार को आई तेजी का असर शुक्रवार को एशियाई बाजारों पर साफ दिखा. अमेरिकी इंडेक्स ‘डाउ जोन्स’ (Dow Jones) गुरुवार को 276.31 अंक (0.55%) उछलकर रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुआ था. इसके बाद शुक्रवार को एशियाई बाजारों में भी मजबूती देखी गई, हालांकि जापान में अप्रैल महीने के महंगाई आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहने के कारण निवेशक थोड़े सतर्क जरूर नजर आए.
घरेलू बाजार में किन सेक्टर्स ने भरा दम ?
भारतीय बाजारों में निचले स्तरों पर हुई खरीदारी (Buying at lower levels) और मुख्य रूप से फाइनेंशियल स्टॉक्स (Banking & Finance) में आई तेजी ने बाजार की अनिश्चितता को दूर करने में मदद की. इसके साथ ही ऑटो और कंजम्पशन (खपत) से जुड़े शेयरों में भी चुनिंदा खरीदारी देखने को मिली.
“घरेलू शेयर बाजार आज एक सीमित दायरे में लेकिन सकारात्मक रुख के साथ कारोबार करते दिखे. वैश्विक स्तर पर जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) निवेश का थीम बाजार को चला रहा है, वहीं घरेलू स्तर पर बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों ने बढ़त की अगुवाई की है.”- विनोड नायर, रिसर्च हेड, जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड
‘बाय ऑन डिप्स, सेल ऑन रैली’ का पैटर्न
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार एक तय दायरे (Range-bound) में फंसा हुआ है. बाजार को संभालने और नीचे गिरने से रोकने में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) का बड़ा हाथ है, जो लगातार पैसा लगा रहे हैं. दूसरी तरफ, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली बाजार को बहुत ऊपर जाने से रोक रही है. मार्केट में अभी “गिरावट पर खरीदें और तेजी पर बेचें” (Buy on dips, Sell on rallies) का रुख बना हुआ है. बाजार में एक टिकाऊ और लंबी तेजी तभी आएगी जब पश्चिम एशिया (Middle East) में पूरी तरह शांति होगी और कच्चे तेल के दाम नीचे आएंगे.
कच्चे तेल की चाल और $200 प्रति बैरल की रिपोर्ट पर बड़ी बात
कच्चे तेल (Crude Oil) में इस हफ्ते भारी उतार-चढ़ाव देखा गया. अमेरिकी बाजारों में गुरुवार को तेल की कीमतें घटने से बॉन्ड यील्ड नीचे आई, जिससे बाजारों को राहत मिली थी. हालांकि, शुक्रवार को एशियाई बाजारों के शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड और यूएस डब्ल्यूटीआई (WTI) फ्यूचर्स में फिर से करीब 2% की तेजी देखी गई, क्योंकि निवेशक अमेरिका-ईरान शांति समझौते की खबरों पर नजर बनाए हुए हैं.
हाल ही में आई ‘वुड मैकेन्ज़ी’ की उस रिपोर्ट पर, जिसमें आशंका जताई गई थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने पर कच्चा तेल $200 प्रति बैरल तक जा सकता है, बाजार एक्सपर्ट महेश ने कहा कि यह रिपोर्ट केवल बेहद गंभीर और काल्पनिक परिस्थितियों (Extreme cases) पर आधारित है, असल में कच्चे तेल की कीमतें उस स्तर तक जाने की कोई उम्मीद नहीं है.
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