सेबी चीफ को जिस ऑटो कंपनी पर था गड़बड़ी का शक, निवेशकों ने IPO पर लुटा दी दौलत

IPO: लघु-मध्यम उद्यम (एसएमई) कंपनी रिसोर्सफुल ऑटोमोबाइल के आईपीओ पर न केवल बाजार विनियामकों ने निवेशकों को सतर्क किया, बल्कि बाजार के विशेषज्ञों ने भी नाक-भौं सिकोड़ लिये थे. इसका आईपीओ 22 अगस्त को खुला और 26 अगस्त को बंद हुआ.

IPO: भारतीय प्रतिभूति एवं विनियामक बोर्ड (सेबी) की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच समेत तमाम नियामकों ने दिल्ली की जिस कंपनी रिसोर्सफुल ऑटोमोबाइल के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को लेकर आशंकाएं जाहिर की थी, उसके आईपीओ पर निवेशकों ने अपनी दौलत लुटा दी. सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच ने मार्च 2024 में एसएमई मंच पर सूचीबद्धता और कारोबार में ‘कीमत गड़बड़ी’ के बारे में चिंता जताई थी और निवेशकों से सतर्क रहने को कहा था. वहीं, पिछले शुक्रवार को सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अश्विनी भाटिया ने चार्टर्ड अकाउंटेंट से एसएमई एक्सचेंज मंच पर सूचीबद्ध कंपनियों का ऑडिट करते समय अधिक सतर्क रहने को कहा था. अब जबकि सिर्फ 12 करोड़ रुपये के लिए रिसोर्सफुल ऑटोमोबाइल का आईपीओ पिछले 22 अगस्त 2024 को खुला, तो 26 अगस्त 2024 को बंद होने के समय तक निवेशकों ने बोलियां लगाकर उसकी झोली में 4,800 करोड़ रुपये डाल दिए.

IPO के पैसों से शोरूम खोलना चाहती है 8 कर्मचारियों वाली कंपनी

साल 2018 में स्थापित रिसोर्सफुल ऑटोमोबाइल कंपनी दिल्ली में साहनी ऑटोमोबाइल ब्रांड से परिचालन करती है. यह यामाहा दोपहिया वाहन से जुड़ी हुई है. रिसोर्सफुल ऑटोमोबाइल दोपहिया वाहनों की बिक्री और सर्विसिंग का काम करती है. दिल्ली में कंपनी के दो शोरूम हैं और कर्मचारियों की संख्या केवल आठ है. कंपनी आईपीओ से हासिल होने वाली रकम से दिल्ली में नया शोरूम खोलेगी. इसके अलावा, वह बाकी के बचे पैसों का इस्तेमाल कर्ज चुकाने, कार्यशील पूंजी जरूरतों को पूरा करने और सामान्य कंपनी उद्देश्यों के लिए करेगी.

रिसोर्सफुल ऑटो के आईपीओ को निवेशकों से मिला बेहतर रिस्पॉन्स

रिसोर्सफुल ऑटोमोबाइल का आईपीओ 22 अगस्त को खुला और 26 अगस्त को बंद हुआ. निवेशकों की ओर से कंपनी के इश्यू को अच्छा रिस्पॉन्स मिला. कंपनी ने 9.76 लाख शेयर बिक्री के लिए रखे, जबकि बोलियां 40.76 करोड़ शेयर के लिए आई. यानी तीन दिन में 419 गुना अभिदान मिला. एसएमई आईपीओ को पहले दिन 10.35 गुना अभिदान मिला, जबकि दूसरे दिन 74.13 गुना अभिदान मिला था. कुल मिलाकर गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी में 315.61 गुना जबकि खुदरा निवेशकों की श्रेणी में 496.22 गुना अभिदान मिला.

एसएमई के आईपीओ पर विशेषज्ञों ने सिकोड़े नाक-भौं

लघु-मध्यम उद्यम (एसएमई) रिसोर्सफुल ऑटोमोबाइल के इस आईपीओ पर न केवल बाजार विनियामकों ने निवेशकों को सतर्क किया, बल्कि बाजार के विशेषज्ञों ने भी नाक-भौं सिकोड़ लिये. जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि एसएमई आईपीओ की मांग की जो रफ्तार है, उसका कोई औचित्य नहीं है. सूचीबद्ध होने के दिन लाभ की उम्मीद में अन्य बातों पर गौर किये बिना बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है. अधिक अभिदान से सूचीबद्धता वाले दिन शेयर में में भारी उछाल आता है. यह सूचीबद्धता के बाद भी मांग के उच्चस्तर पर बने रहने के कारण शेयर भाव को ऊंचा रखता है. हम उम्मीद कर सकते हैं कि मध्यम अवधि में इस तरह का अति उत्साह खत्म हो जाएगा, क्योंकि शेयर बाजार में मजबूती तेज रहेगी.

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सेबी ने कीमत गड़बड़ी को लेकर

सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अश्विनी भाटिया ने पिछले शुक्रवार को चार्टर्ड अकाउंटेंट से एसएमई एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध कंपनियों का ऑडिट करते समय अधिक सतर्क रहने को कहा था. वहीं, सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच ने मार्च 2024 में एसएमई प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्धता और कारोबार में ‘कीमत गड़बड़ी’ के बारे में चिंता जताई थी और निवेशकों से सतर्क रहने को कहा था. रिसोर्सफुल ऑटोमोबाइल के दस्तावेज के अनुसार, आईपीओ में 10.25 लाख इक्विटी शेयर शामिल हैं. इनकी कीमत 117 रुपये प्रति शेयर रखी गई थी. यानी कुल मिलाकर यह 11.99 करोड़ रुपये का इश्यू था.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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