SEBI Action: सेबी की अब तक की सबसे बड़ी छापेमारी, 300 करोड़ रुपए का घोटाला, 15 से 20 फर्जी कंपनियां शामिल

SEBI Action: सेबी ने पैसो के मामले में अब तक की सबसे बड़ी छापेमारी की है. इस स्कैम में 300 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया है. ये स्कैम का मामला अहमदाबाद, मुंबई और गुरुग्राम की कंपनियों का है.

SEBI Action: SEBI ने फर्जी कंपनियों पर एक्शन लेने की पूरी तैयारी कर ली है. रिपोर्टस के मुताबिक, सेबी ने 18 जून को अहमदाबाद, मुंबई और गुरुग्राम में छापेमारी करके 300 करोड़ रुपए के पंप और डंप रैकेट का भंडाफोड़ किया है. पैसों के लिहाज से देखें तो ये सेबी की अब तक की सबसे बड़ी छापेमारी है.

इस छापेमारी में 15 से 20 फर्जी कंपनियां शामिल है, जिन्हें कथित तौर पर कुछ लिस्टेड कंपनियों के प्रमोटरों ने अपने शेयरों को बेचने के लिए बनाया था. रिपोर्टस की मानें तो, कम से कम दो लिस्टेड एग्रो-टेक कंपनियां और उनके प्रमोटर कथित नेटवर्क के हेड हैं. सेबी ने इस दौरान कंपनी के डाक्यूमेंट्स और रबर स्टैम्प समेत कई डॉक्युमेंट्स जब्त किए हैं.

घोटाला 300 करोड़ रुपए का

बताया जा रहा है घोटाला कम से कम 300 करोड़ रुपए का है, अभी सेबी की तरफ से जब्त डॉक्युमेंट्स को एनालाइज करने के बाद और ज्यादा जानकारी सामने आने की उम्मीद है. इनमें से एक कंपनी का शेयर तो एक साल से भी कम समय में 1 से 40 रुपये तक बढ़ गया और फिर से वापस 2-3 रुपए पर आ गया. जबकि इस दौरान कंपनी के कारोबार और इनकम में भी कोई खास बदलाव नहीं हुआ है. इसलिए ये साफ तौर पर एक धोखाधड़ी वाली योजना की ओर इशारा करता है.

फर्जी कंपनियों का घोटाला

वैसे तो पंप और डंप स्कीम्स के मामलों में सेबी संस्थाओं के खिलाफ आदेश जारी करती है. ऐसे कम ही मामले देखने को मिलते हैं, जहां मार्केट रेग्युलेटर संस्थाओं के खिलाफ तलाशी और जब्त करने की पावर का इस्तेमाल करता है.

जानकारी के मुताबिक, कंपनियों के प्रमोटरों ने ऐसी फर्जी कंपनियां बनाईं, जो मालिकाना व्यापारियों के रूप में रजिस्टर्ड थीं और जिन्होंने कंपनी के शेयरों को खरीदा और बेचा. पहले भी ऐसे कई मामले आएं है, जहां सेबी ने स्मॉल और मिड-कैप कंपनियों के प्रमोटरों के खिलाफ उनके शेयरों में हेरफेर करने के लिए कार्रवाई की है.

पंप और डंप स्कीम्स

धोखेबाजों से संबंधित संस्थाएं पंप और डंप स्कीम्स में सबसे पहले शेयर की कीमतें बढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में शेयर खरीदना शुरू करती हैं. रिटेल इन्वेस्टर कीमत बढ़ने पर इन शेयरों की तरफ आकर्षित हो जाते हैं. इसी मौके का फायदा उठाते हुए हेरफेर करने वाली संस्थाएं भोले-भाले रिटेल इन्वेस्टर्स को शेयर बेच देती हैं और लाभ कमाकर बाहर निकल जाती हैं.

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Published by: Shailly arya

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