10 अगस्त को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले चार पैसे मजबूत होकर खुला. रुपया 95.17 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.21 रुपये पर बंद हुआ था. अमेरिकी जॉब्स के कमजोर आंकड़ों से फेडरल रिजर्व की जल्द ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद कम हुई है, जिसका असर डॉलर पर भी पड़ा. हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अनिश्चितता के चलते बाजार में सावधानी बनी हुई है.
अमेरिकी जॉब्स डेटा से रुपये को कैसे मिला सहारा?
अमेरिका में रोजगार के आंकड़े उम्मीद से काफी कमजोर रहे. आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिकी अर्थव्यवस्था में करीब 80,000 नौकरियों के जुड़ने की उम्मीद थी, लेकिन इसके बजाय 23,000 नौकरियां कम हुई. मई और जून के आंकड़ों में भी कुल 1.03 लाख नौकरियों की कमी का संशोधन किया गया. इस कमजोर आंकड़े के बाद निवेशकों ने सितंबर में फेडरल रिजर्व की ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद कम कर दी. सितंबर में रेट बढ़ने की संभावना करीब 70 फीसदी से घटकर लगभग 50-50 रह गई. इसके चलते डॉलर इंडेक्स 99.40 पर आ गया, जो करीब दो महीने का निचला स्तर है.
फिर रुपये पर दबाव की चिंता क्यों?
रुपये को अमेरिकी डॉलर में कमजोरी से राहत मिली है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतें चिंता बढ़ा रही हैं. ब्रेंट क्रूड करीब 0.6 फीसदी चढ़कर 84 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच स्थिति अभी साफ नहीं है. ईरान ने 9 अगस्त को कहा कि ओमान के साथ नए शिपिंग रूट को लेकर समझौता लगभग तैयार है. हालांकि, उसका कहना है कि यह अहम ऊर्जा मार्ग तभी खुलेगा, जब अमेरिका उसकी दूसरी शर्तें भी मानेगा.
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RBI और तेल की कीमतें रुपये के लिए क्यों अहम हैं?
वेस्ट एशिया में तनाव और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण निवेशकों की नजर महंगाई के आंकड़ों पर भी है. इस हफ्ते अमेरिका और भारत, दोनों के कंज्यूमर इन्फ्लेशन के आंकड़े आने हैं. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया रुपये में तेज गिरावट पर नजर बनाए हुए है. ट्रेडर्स के मुताबिक, रुपया 95 रुपये प्रति डॉलर के ऊपर रहने पर इंपोर्टर्स अपनी डॉलर खरीद बढ़ा सकते हैं. CR Forex Advisors के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित पाबारी के मुताबिक, 95-95.10 रुपये का स्तर रुपये के लिए मजबूत सहारा बना रह सकता है. इस हफ्ते तेल की कीमतें और RBI की डॉलर खरीद रुपये की दिशा तय करने वाले अहम फैक्टर रहेंगे.
आगे रुपये की चाल कैसी रह सकती है?
RBI ने पिछले हफ्ते पॉलिसी रेट में कोई बदलाव नहीं किया था. वहीं, ANZ के एनालिस्ट्स का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक दिसंबर से कम से कम दो बार 25 बेसिस पॉइंट की दर बढ़ोतरी कर सकता है. ANZ के मुताबिक, महंगाई की बढ़ती उम्मीदें, ग्लोबल कमोडिटी की ऊंची कीमतें और घरेलू मांग की मजबूती से आगे महंगाई RBI की मौजूदा उम्मीद से तेज बढ़ सकती है. ऐसे में आने वाले दिनों में रुपये पर अमेरिकी डॉलर के साथ-साथ कच्चे तेल और महंगाई के आंकड़ों का भी असर देखने को मिलेगा.
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