Rupee vs Dollar: सोमवार को भारतीय रुपये की शुरुआत मजबूती के साथ हुई. घरेलू करेंसी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 3 पैसे सुधरकर 94.97 पर खुली, जबकि पिछले सत्र में यह 95.00 के स्तर पर बंद हुई थी. मई के महीने में रिकॉर्ड गिरावट (96.96 प्रति डॉलर) देखने के बाद रुपये में यह सुधार आया है, लेकिन बाजार के जानकारों का मानना है कि आगे की राह इतनी आसान नहीं होगी.
डॉलर के सामने रुपये पर क्यों है दबाव?
शुरुआती सुधार के बावजूद रुपये के सामने कई बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं, जो इसे वापस कमजोर कर सकती हैं:
- विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) भारतीय बाजारों से लगातार पैसे निकाल रहे हैं. पिछले शुक्रवार को ही इन्होंने 2 अरब डॉलर से ज्यादा के शेयर बेचे, जिससे डॉलर की मांग अचानक बढ़ गई.
- अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेत: इस समय दुनिया भर में डॉलर मजबूत हो रहा है, जिसका अंदाजा 99.05 पर चल रहे डॉलर इंडेक्स से लगाया जा सकता है. इसके अलावा, अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड भी 4.47% पर पहुंच गई है, जिससे निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिका में लगा रहे हैं.
RBI रुपये को बचाने के लिए क्या कर रहा है?
जब भी डॉलर के मुकाबले रुपया बहुत तेजी से गिरने लगता है, रिजर्व बैंक (RBI) बाजार में दखल देता है. डेटा के मुताबिक, देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) घटकर 681.4 अरब डॉलर पर आ गया है, जो पिछले एक साल का सबसे निचला स्तर है. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि RBI रुपये में ज्यादा उतार-चढ़ाव रोकने के लिए लगातार एक्टिव है. इसके अलावा, केंद्रीय बैंक ने अप्रैल के अंत तक अपनी शॉर्ट फॉर्वर्ड डॉलर प्रतिबद्धताओं को भी घटाकर 95.3 अरब डॉलर कर दिया है, ताकि रुपये को एक मजबूत सपोर्ट मिल सके.
आने वाले दिनों में क्या होगी रुपये की चाल?
फॉरेक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तकनीकी रूप से USD/INR जोड़ी के लिए 95.50 से 95.75 का दायरा एक मजबूत रेजिस्टेंस (रुकावट) बना हुआ है. अगर वैश्विक स्तर पर सेंटिमेंट सुधरता है, तो रुपया आने वाले समय में मजबूत होकर 94.00 से 94.50 के स्तर तक भी जा सकता है. वहीं, करेंसी एडवाइजरी फर्म आईएफए ग्लोबल का अनुमान है कि अगले एक महीने (4 से 6 हफ्ते) के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले 94.40 से 96.20 के दायरे में ही घूमता रहेगा.
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