₹93.50 के स्तर तक गिर सकती है भारतीय मुद्रा; कच्चा तेल और मजबूत डॉलर ने बढ़ाई चिंता

Rupee Vs Dollar: एक तरफ जहां कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं. फरवरी 2026 से अब तक $20 बिलियन से अधिक की निकासी हो चुकी है.

Rupee Vs Dollar: भारतीय रुपये के लिए यह सप्ताह चुनौतियों भरा रहने वाला है. अमेरिका-ईरान राजनयिक प्रयासों की विफलता और फारस की खाड़ी में नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली तेल आपूर्ति ठप होने का डर पैदा कर दिया है. इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें $102 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं.

चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर है, इसलिए कच्चे तेल में $10 का हर उछाल देश के चालू खाता घाटे (CAD) को सालाना लगभग $15 बिलियन बढ़ा सकता है.

भारी उतार-चढ़ाव और ग्लोबल प्रेशर

पिछले सप्ताह रुपये में जबरदस्त अस्थिरता (Volatility) देखी गई. यह ₹95.23 के अपने रिकॉर्ड निचले स्तर को छूने के बाद सुधार के साथ ₹92.40 तक आया था, लेकिन संघर्ष बढ़ने के साथ यह फिर से ₹93.30 के स्तर पर कमजोर हो गया है. इसके अलावा, सुरक्षित निवेश (Safe-haven demand) के रूप में अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मांग और बढ़ते बॉन्ड यील्ड ने उभरते बाजारों की मुद्राओं, विशेषकर रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है.

विदेशी निवेशकों की निकासी

एक तरफ जहां कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं. फरवरी 2026 से अब तक $20 बिलियन से अधिक की निकासी हो चुकी है. हालांकि, राहत की बात यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास $697.1 बिलियन का विशाल विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) मौजूद है. यह भंडार रुपये में होने वाली किसी भी अनियंत्रित गिरावट को रोकने के लिए एक ‘डिफेंसिव कुशन’ का काम करेगा.

आयातित महंगाई और CAD का बढ़ता जोखिम

कच्चे तेल की ऊंची कीमतें न केवल रुपये को कमजोर कर रही हैं, बल्कि ‘आयातित महंगाई’ (Imported Inflation) का खतरा भी बढ़ा रही हैं. इससे देश के व्यापार संतुलन पर बुरा असर पड़ता है. रिपोर्ट के अनुसार, जब तक ब्रेंट क्रूड की कीमतें स्थिर नहीं होतीं या पश्चिम एशिया में शांति की कोई ठोस उम्मीद नहीं दिखती, तब तक रुपये का रुझान कमजोर (Bearish) बना रहेगा.

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By Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

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अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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