रिटायरमेंट के बाद चाहिए 50,000 की ‘पेंशन ‘? तो आज ही जान लें 1.7 करोड़ का यह जादुई गणित

Retirement Planning : क्या आप रिटायरमेंट के बाद 50,000 रुपये महीने का खर्च चाहते हैं? जानिए कैसे 1.7 करोड़ रुपये का फंड और सही एसआईपी (SIP) स्ट्रेटेजी आपके बुढ़ापे को आर्थिक रूप से सुरक्षित बना सकती है.

Retirement Planning : रिटायरमेंट की प्लानिंग करना थोड़ा मुश्किल लग सकता है, खासकर तब जब आपको यह अंदाजा न हो कि सम्मानजनक जीवन जीने के लिए कितने पैसों की जरूरत होगी. अगर आप यह मानकर चल रहे हैं कि रिटायरमेंट के बाद आपका मासिक खर्च आज के हिसाब से 50,000 रुपये होगा, तो आपको आज से ही एक बड़ी पूंजी जुटाने की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए.

आज के 50 हजार कल के बराबर नहीं

रिटायरमेंट प्लानिंग सिर्फ एक मोटी रकम जमा करना नहीं है. आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपके पास अगले 25 से 30 साल तक नियमित कमाई आती रहे. सबसे बड़ी चुनौती है महंगाई. आज जो सामान 50,000 रुपये में आ रहा है, 20 साल बाद उसकी कीमत कहीं ज्यादा होगी. द वेल्थ कंपनी की सीआईओ अपर्णा शंकर के अनुसार, अगर आप 50,000 रुपये महीना खर्च करना चाहते हैं, तो इसका मतलब है कि आपको साल भर में 6 लाख रुपये की जरूरत होगी.

कितना बड़ा होना चाहिए आपका फंड ?

रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले रिटर्न और महंगाई के बीच के अंतर को समझना जरूरी है.

अगर हम मान लें कि रिटायरमेंट के बाद आपको निवेश पर 7-8% रिटर्न मिलता है और महंगाई 6% रहती है, तो आपकी असल कमाई केवल 1.5-2% ही होगी. भारत के माहौल और बढ़ती उम्र को देखते हुए 3.5% की सुरक्षित निकासी दर (Safe Withdrawal Rate) सही मानी जाती है. इस हिसाब से, 6 लाख रुपये सालाना खर्च चलाने के लिए आपको लगभग 1.7 करोड़ रुपये (6 लाख ÷ 0.035) का रिटायरमेंट फंड चाहिए होगा.

इस लक्ष्य तक कैसे पहुंचें?

अगर आपके पास रिटायरमेंट के लिए 20 साल का समय है (जैसे 40 से 60 की उम्र), तो आप अनुशासित निवेश के जरिए यह मुकाम हासिल कर सकते हैं.

  • SIP का सहारा: एक अच्छे म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में हर महीने 15,000 से 17,000 रुपये की एसआईपी (SIP) शुरू करें. अगर आपको सालाना 12% का रिटर्न मिलता है, तो आप 1.7 करोड़ के लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं.
  • निवेश बढ़ाते रहें: जैसे-जैसे आपकी सैलरी बढ़े, अपनी एसआईपी को हर साल कम से कम 10% बढ़ाएं. इससे आप महंगाई को मात दे पाएंगे.
  • सही बटवारा (Asset Allocation): शुरुआत में 70% पैसा इक्विटी (शेयर बाजार) और 30% डेट (सुरक्षित फंड) में रखें. जैसे-जैसे रिटायरमेंट पास आए, रिस्क कम करने के लिए सुरक्षित फंड्स में पैसा शिफ्ट कर दें.

इन बातों का भी रखें ध्यान

रिटायरमेंट प्लानिंग सिर्फ रोजमर्रा के खर्चों के लिए नहीं है. आपको टैक्स, स्वास्थ्य देखभाल (Healthcare) और अचानक आने वाले खर्चों के लिए भी अलग से इंतजाम रखना चाहिए. रिटायरमेंट का असली मतलब बुढ़ापे में अपनी आजादी और मानसिक शांति को सुरक्षित करना है.

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लेखक के बारे में

By Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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