रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के नतीजे आज होंगे जारी, विशेषज्ञों ने बताया बढ़ सकता है ब्याज या नहीं

RBI: विशेषज्ञों ने मुद्रास्फीति के नियंत्रण में होने और आर्थिक वृद्धि की रफ्तार संतोषजनक होने के आधार पर यह अनुमान जताया है.

RBI: भारतीय रिजर्व बैंक के द्वारा इस सप्ताह की छह और सात तारीख को मौद्रिक नीति समीक्षा की बैठक का आयोजन किया गया था. इस बैठक के नतीजों के बारे में जानकारी आज आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास के द्वारा सुबह दस बजे प्रेसवार्ता करके दी जाएगी. ऐसे में पूरे बाजार की नजर शीर्ष बैंक के फैसलों पर लगी है.

बताया जा रहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक इस सप्ताह अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में अल्पकालिक ब्याज दर पर यथास्थिति बनाए रख सकता है. विशेषज्ञों ने मुद्रास्फीति के नियंत्रण में होने और आर्थिक वृद्धि की रफ्तार संतोषजनक होने के आधार पर यह अनुमान जताया है. आरबीआई ने अपनी पिछली चार द्विमासिक समीक्षाओं में नीतिगत रेपो दर को अपरिवर्तित रखा है.

आरबीआई ने आखिरी बार फरवरी 2023 में रेपो दर को बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत किया था. रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों की वजह से महंगाई बढ़ने के कारण मई 2022 में रेपो दर में बढ़ोतरी का दौर शुरू हुआ था जो फरवरी, 2023 तक चलता रहा. लेकिन अप्रैल, 2023 की द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा से रेपो दर स्थिर बनी हुई है.

Also Read: RBI: दो हजार के 97.26% नोट बैंक में आए वापस, अगर आपके पास भी है तो न हो परेशान, रिजर्व बैंक ने कही ये बात

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक छह दिसंबर को शुरू होगी. मौद्रिक नीति के संदर्भ में सर्वोच्च नीति नियामक एमपीसी के दर संबंधी फैसले की घोषणा आठ नवंबर को की जाएगी. बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि केंद्रीय बैंक इस बार नीतिगत ब्याज दरों के साथ अपने मौद्रिक रुख पर भी पुराना रुख कायम रख सकता है.

मदन सबनवीस ने कहा कि जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान जीडीपी में दर्ज 7.6 प्रतिशत की वृद्धि यह भरोसा देती है कि अर्थव्यवस्था पटरी पर है. पिछले कुछ महीनों में कम मुद्रास्फीति के आंकड़े भी इस बात की गुंजाइश देते हैं कि दरें बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है.

नोमुरा में अर्थशास्त्री (भारत) ऑरोदीप नंदी को भी उम्मीद है कि एमपीसी अपनी दिसंबर की नीतिगत बैठक में दरें नहीं बढ़ाने का सर्वसम्मत फैसला करेगी. धानुका समूह के चेयरमैन आर जी अग्रवाल ने भी ऐसी ही उम्मीद जताते हुए कहा कि भारतीय कृषि को तकनीकी प्रगति को अपनाना चाहिए और इसके लिए किफायती वित्तपोषण जरूरी है.

आरबीआई की एमपीसी में तीन बाहरी और तीन अंदरुनी सदस्य हैं. बाहरी सदस्यों के तौर पर शशांक भिडे, आशिमा गोयल और जयंत आर वर्मा हैं जबकि अंदरूनी सदस्यों में गवर्नर शक्तिकांत दास, कार्यकारी निदेशक राजीव रंजन और डिप्टी गवर्नर माइकल देवव्रत पात्रा शामिल हैं.

(भाषा इनपुट)

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: Agency

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >