रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कपड़ा निर्माता आलोक इंडस्ट्रीज के 37.7 फीसदी शेयर किये हासिल

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शनिवार को कहा कि उसने दिवाला संहिता के तहत कपड़ा निर्माता आलोक इंडस्ट्रीज लिमिटेड में 37.7 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की है.

नयी दिल्ली : रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शनिवार को कहा कि उसने दिवाला संहिता के तहत कपड़ा निर्माता आलोक इंडस्ट्रीज लिमिटेड में 37.7 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की है. यह सौदा 250 करोड़ रुपये में हुआ. आलोक इंडस्ट्रीज के अधिग्रहण के लिए रिलायंस ने जेएम फाइनेंशियल एसेट रिकन्सट्रक्शन कंपनी लिमिटेड के साथ संयुक्त रूप से बोली लगायी थी. उधारदाताओं के ऋणों की वसूली के लिए आलोक इंडस्ट्रीज को दिवालियापन कानून के तहत नीलाम किया गया. नेशनल कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की अहमदाबाद पीठ ने पिछले साल संयुक्त बोली को मंजूरी दी थी.

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने शेयर बाजार को बताया कि स्वीकृत प्रस्ताव के अनुसार, आलोक ने आज आरआईएल को एक रुपये मूल्य के 83.33 करोड़ इक्विटी शेयर प्रीमियम पर दो रुपये प्रति शेयर की दर से आवंटित किये, जिसके लिए कुल 250 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. आरआईएल ने बताया कि इस अधिग्रहण के बाद उसके पास आलोक इंडस्ट्रीज के 37.7 फीसदी इक्टिटी शेयर होंगे.

राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की अहमदाबाद पीठ ने मार्च, 2019 में आलोक इंडस्ट्रीज पर चढ़े कर्ज के समाधान के लिए एक मात्र आरआईएल-जेमए फाइनेंशियल एआरसी (ऋण/सम्पत्ति पुनर्गठन कंपनी) से मिली 5050 करोड़ रुपये की योजना मंजूर कर ली थी. इसके लिए 4550 करोड़ रूपये ऋण से जुटाये जाने थे और 500 करोड़ रुपये शेयर पूंजी के तौर पर निवेश किये जाने थे.

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Author: KumarVishwat Sen

Published by: Prabhat Khabar

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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